फ्लैट बायर्स के लिए अच्छी खबर, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- घर खरीदार पर बिल्डर नहीं थोप सकता एकतरफा एग्रीमेंट

 13 Jan 2021 07:53 PM

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि घर खरीदार पर बिल्डर एकतरफा शर्तें नहीं तोप सकता। एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एग्रीमेंट कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत अपार्टमेंट बायर्स एग्रीमेंट की शर्त का एकतरफा और गैरवाजिब होना अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस है। कोर्ट ने यहां तक कहा कि अगर बिल्डर ने प्रोजेक्ट को समय से पूरा कर के डिलीवरी नहीं दी तो बिना किसी बहस के उसे घर खरीदार को पूरे पैसे वापस देने होंगे। इस मामले में कोर्ट ने कहा कि बिल्डर को पैसे 9 फीसदी ब्याज के साथ लौटाने होंगे। गुरुग्राम के एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोर्ट के आदेश का पालन नहीं होता है तो घर खरीदार को पूरी राशि 12 फीसदी ब्याज के साथ चुकानी पड़ेगी। क्या था मामला: गुरुग्राम के एक बिल्डर ने याचिका लगाई थी जिसमें उसने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। बिल्डर ने चार बिंदुओं का उल्लेख अपनी याचिका में किया था। - कब्जा देने के लिए 42 महीने की अवधि को कब से माना जाए, बिल्डिंग प्लान की मंजूरी के दिन से या फिर फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट मिलने के दिन से? - क्या बिल्डर बायर एग्रीमेंट की शर्तें एक तरफा और बिल्डर के हित में हैं? - क्या रेरा के होते हुए भी कोई घर खरीदार उपभोक्ता अदालत में जा सकता है? - क्या प्रोजेक्ट में देरी होने को आधार बनाकर घर खरीदार एग्रीमेंट को रद्द कर अपने पैसे ब्याज समेत वापस ले सकता है? बिल्डर ने घर खरीदार को आॅफर दिया था कि वह दूसरे प्रोजेक्ट में घर ले ले, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये घर खरीदार की मर्जी पर निर्भर करता है, वह बिल्डर की बात मानने के लिए बाध्य नहीं है। इसे उपभोक्ता कानून 1986 के तहत गलत बताया गया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ये कहा कि घर खरीदार रेरा के साथ-साथ उपभोक्ता अदालत का दरवाजा भी खटखटा सकता है।