हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा- आम लोगों पर फाइन, रैलियों में नेताओं पर जुर्माना क्यों नहीं; 30 अप्रैल तक जवाब मांगा

 08 Apr 2021 07:09 PM

नई दिल्ली। देश में कोरोनावायरस की दूसरी लहर से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। इस बीच, चुनावी रैलियों में राजनीतिक पार्टियों के नेता कोरोना गाइडलाइंस का खुलकर उल्लंघन कर रहे हैं। इसी मामले को आधार बनाकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। हाईकोर्ट ने इस पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर 30 अप्रैल तक जवाब मांगा है। जबकि पांच राज्यों के चुनाव में आखिरी चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को है।

दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अर्जी में कहा गया था कि केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए एसओपी यानी स्टैंडर्ड आॅपरेटिंग प्रोसीजर जारी किया है, लेकिन इसका राजनीतिक दलों के नेताओं और चुनावी रैलियों में पालन नहीं हो रहा है। याचिका में मांग की गई थी कि केंद्रीय चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि वह केंद्र सरकार द्वारा जारी निर्देशों का सख्ती से पालन करवाएं और इसके लिए चुनाव की ड्यूटी में लगे अधिकारियों को निर्देश दें।

यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने 17 मार्च को ये याचिका हाइकोर्ट में दायर की थी। कोर्ट ने उस याचिका पर 22 मार्च को सुनवाई करते हुए नोटिस जारी करके केंद्रीय गृह मंत्रालय और चुनाव आयोग से 30 अप्रैल तक अपना जवाब दायर करने का आदेश दिया था।

याचिका में यह सवाल उठाए गए...
एक तरफ आम आदमी से मास्क ना लगाए जाने पर जुर्माना वसूला जा रहा है तो दूसरी तरफ राजनैतिक दलों के राजनेता खुलेआम बिना मास्क के ही घूम रहे हैं और प्रचार प्रसार में लगे हैं। चुनावी रैलियों में भी कहीं कोई नियम का पालन नहीं हो रहा है।

कोर्ट ने 30 अप्रैल तक सरकार को जवाब देने का समय दिया है। लेकिन देखा जाए तो पांचों राज्यों में सबसे आखिरी में पश्चिम बंगाल में वोटिंग है। यहां 29 अप्रैल को 8वें चरण का मतदान होगा। यानी चुनाव प्रचार 27 अप्रैल को थम जाएगा। इसके बाद मामले में आगे सुनवाई होगी।