भारत के वैज्ञानिक दंपती का दावा: वुहान लैब से लीक हुआ कोरोना वायरस, अमेरिकी राष्ट्रपति ने दिए जांच के आदेश

 06 Jun 2021 09:48 AM

नई दिल्ली। देश के साथ ही दुनियाभर में कोरोना वायरस का कहर लगातार जारी है। ऐसे में इस जानलेवा वायरस की उत्पत्ति को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। वहीं ज्यादातर वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि यह वायरस चीन में स्थित वुहान लैब से लीक हुआ है। इसके समर्थन में वैश्विक स्तर पर कई तथ्य भी पेश किए जा रहे हैं। इस बीच पुणे के रहने वाले एक वैज्ञानिक दंपती ने कुछ तथ्य जुटाए हैं, जिससे पता चलता है कि सार्स-सीओवी-2 वायरस (कोविड-19) वुहान में एक लैब से उत्पन्न हुआ न कि मछली बाजार से। चीन कोरोना वायरस की उत्पत्ति सीफूड मार्केट से होने का दावा करता आ रहा है।  


मछली बाजार से नहीं निकला वायरस
वैज्ञानिक दंपती डॉ. राहुल बाहुलिकर और डॉ. मोनाली राहलकर ने विश्व के कई देशों में बैठे अनजान लोगों के साथ मिलकर इंटरनेट से इस संबंध में सबूत जुटाए हैं। जिन लोगों ने इंटरनेट से सबूत एकत्रित किए हैं, वे पत्रकार, गुप्तचर या खुफिया एजेंसियों के लोग भी नहीं हैं। वे अनजान लोग हैं, जिनका मुख्य स्रोत ट्विटर और दूसरे ओपन सोर्स हैं। इन लोगों ने अपने समूह को ड्रैस्टिक (डीसेंट्रलाइज्ड रेडिकल ऑटोनॉमस सर्च टीम इनवेस्टिगेटिेंग कोविड-19) का नाम दिया है। इन लोगों का मानना है कि कोरोना चीन के मछली बाजार से नहीं बल्कि वुहान की लैब से निकला है। इनकी इस थ्योरी को पहले षड्यंत्र बताकर खारिज कर दिया गया था। लेकिन इसने अब दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।


वायरस के जीनोम में बदलाव किए गए
वैज्ञानिक दंपती ने बताया वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी और वुहान में अन्य लैब वायरस पर प्रयोग कर रहे थे। आशंका है कि उन्होंने वायरस के जीनोम में कुछ बदलाव किए और यह संभव है कि यह इस दौरान मौजूदा कोरोना वायरस की उत्पत्ति हो गई। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना पहला प्री प्रिंट प्रकाशित करने के बाद, एक ट्विटर यूजर सीकर से संपर्क किया। यह ड्रैस्टिक नामक समूह का हिस्सा है। ड्रैस्टिक यानी डीसेंट्रलाइज्ड रेडिकल ऑटोनॉमस सर्च टीम इंवेस्टीगेटिंग कोविड-19 नाम दिया है। यह समूह कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर सुबूत जुटा रहा है।


डॉ. बाहुलिकर ने बताया कि सीकर छिपे शोध सामग्री को खोजने में माहिर है। उन्होंने चीनी भाषा में एक थीसिस साझा कि जिसमें खनिकों में हुई गंभीर बीमारी के बारे में विस्तृत जानकारी दी है। उनके लक्षण बहुत हद तक कोविड-19 से मिलते जुलते थे। उनके सीटी स्कैन की तुलना कोविड मरीजों से भी की गई और पता चला कि वे लगभग एक जैसे थे।