दिल्ली बॉर्डर से आए किसानों ने 4 घंटे में लाल किले पर कब्जा जमाया, खालसा पंथ समेत दो झंडे फहराए, लाहौरी गेट का दरवाजा तोड़ा

 26 Jan 2021 06:00 PM

नई दिल्ली। नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर किसानों का आंंदोलन 26 जनवरी को हिंसक हो गया। सुबह 9.30 बजे के बाद सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर से निकले हजारों की संख्या किसान दोपहर 1.30 बजे अभेद्य सुरक्षा वाले लाल किले तक पहुंच गए। यहां लाल किले पर पहुंचकर अपना झंडा फहराया और जमकर बवाल काटा। किसानों ने यहां दो झंडे फहराए। एक झंडा धार्मिक (खालसा पंथ) का था, दूसरा किसान यूनियन का। करीब एक घंटे तक ये उपद्रव चलता रहा। इसके बाद किसान नेताओं ने अपील की सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग किया, तब प्रदर्शनकारियों को प्राचीर से हटाया जा सका, लेकिन उन्हें लाल किले से हटाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। ऐहतियातन इस इलाके में रात 12 बजे तक के लिए इंटरनेट बंद कर दिया गया है। जो इलाके हिंसाग्रस्त हैं, वहां इंटरनेट सेवाएं सस्पेंड की गई हैं

 इधर, दिल्ली में बिगड़ते हालात के मद्देनजर गृह मंत्री अमित शाह ने आपात बैठक बुलाई है। मीटिंग में दिल्ली पुलिस, इंटेलिजेंस और गृह मंत्रालय के आला अधिकारी मौजूद हैं।

लालकिला के लाहौरी गेट पर लगा दरवाजा उपद्रवी किसानों ने तोड़ दिया है। इसके बाद उपद्रवी मीना बाजार तक पहुंच गए हैं। यहां नुकसान के बारे में पता किया जा रहा है। कर्मचारियों ने अपने को कार्यालय में बंद कर लिया है। प्रदर्शनकारियों ने फिर ध्वजारोहण स्थान पर कब्जा कर लिया था। हजारों की संख्या में लोग ध्वजारोहण स्थान पर पहुंच गए थे। किसानों के ट्रैक्टर मार्च ने आक्रामक आंदोलन का रूप ले लिया। दिल्ली-एनसीआर में दर्जनों जगहों पर उपद्रव मचाया। लाखों रुपए की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। लाल किला के अंदर भी तमाम तोड़फोड़ की। किसानों ने दो अन्य जगहों पर भी इसी तरह से गुंबद पर चढ़कर झंडा फहराया। ये सभी अपने साथ झंडा लेकर आए थे। जिस जगह पर उपद्रवी किसानों ने झंडा फहराया, वहां स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झंडा फहराते हैं। इसी के सामने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।  

यह है मसला
तीन कृषि कानूनों को खत्म किए जाने की मांग को लेकर किसानों ने आज किसान गणतंत्र परेड का आयोजन किया। किसानों की ओर से राजधानी-एनसीआर के इलाके में ट्रैक्टर मार्च निकाला गया। इसके लिए किसान संगठनों की ओर से कई दिनों से तैयारी की जा रही थी। दिल्ली पुलिस और किसानों की कई दौर की बातचीत के बाद रूट तय किए गए थे। इसके बाद किसान गणतंत्र दिवस के दिन दोपहर 12 बजे परेड के बाद ट्रैक्टर मार्च निकालने को तैयार हुए थे। आपसी सहमति के बाद परेड निकाली जानी थी। इस बीच, सुबह 9 बजे से ही किसानों ने सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर, यूपी गेट और नोएडा इंट्री पॉइंट पर आगे बढ़ने की कोशिशें शुरू कर दी थीं।