नेकी: मोबाइल नहीं होने से बच्चे नहीं ले पा रहे थे ऑनलाइन क्लास, सिपाही ने ड्यूटी के बाद 30-35 बच्चों को पढ़ाना शुरू किया

 19 Oct 2020 01:25 PM
नई दिल्ली। कोरोना ने हमारे जीवन को कभी प्रभावित किया। इसके आने से हमारे जीवन में बहुत से परिवर्तन आए हैं। बच्चों ने ऑनलाइन पढ़ाई करना शुरू कर दिया। पर उन बच्चों का क्या जिनके पास मोबाइल फोन ही नहीं हैं। लाल किले की पार्किंग स्थित सार्इं मंदिर के पास स्थित झुग्गी बस्ती में रहने वाले कई बच्चे शिक्षा वंचित हैं। ऐसे बच्चों की पढ़ाई का बीड़ा दिल्ली पुलिस के एक सिपाही थान सिंह ने उठाया है।
लाल किले की पार्किंग स्थित साईं मंदिर में सिपाही ने गरीब व असहाय बच्चों के लिए दोबारा पाठशाला शुरू कर दी है। इससे पहले भी वह बच्चों को निशुल्क शिक्षा दिया करते थे। लॉकडाउन होने के कारण इन बच्चों की शिक्षा अधूरी रह गई थी।
मूल रूप से राजस्थान के अलवर निवासी थान सिंह फिलहाल द्वारका में रहते हैं। वह उत्तरी दिल्ली के कोतवाली थाने में सिपाही पद पर तैनात हैं। लॉकडाउन से पहले गरीब परिवारों के बच्चों को निशुल्क शिक्षा देते थे। कोरोना संक्रमण की वजह से पढ़ाई में बाधा आ गई, जिसे पूरा करने के लिए वह लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। 
अनलॉक होने के चलते कोरोना काल में बच्चों की पढ़ाई दोबारा से शुरू तो की गई, लेकिन उसे ऑनलाइन कर दिया गया। ऑनलाइन व्यवस्था के बीच वह बच्चे शिक्षा से वंचित रह गए, जिनके पास मोबाइल नहीं था। ऐसे बच्चों की पीड़ा देखकर सिपाही ने कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए ड्यूटी से छुट्टी मिलने के बाद बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया है। 
उनकी पाठशाला में प्रतिदिन 30 से 35 बच्चे पढ़ते हैं। उन्होंने बताया कि वह करीब 10 साल से पढ़ा रहे हैं। उनका उद्देश्य समाज को शिक्षित करना है। साथ ही, बच्चों को संस्कारवान बनाना भी उनका लक्ष्य है।