पेट्रोल-डीजल ही नहीं, सीएनजी से भी वातावरण को नुकसान

 22 Jul 2021 11:54 PM

नई दिल्ली हाल ही में जारी ग्रीनपीस इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली सहित देश के कई बड़े शहरों में पिछले साल की तुलना में नाइट्रोजन क्साइड की मात्रा में इजाफा हुआ है। सैटेलाइट डाटा विश्लेषण के आधार पर तैयार रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल, 2020 की तुलना में अप्रैल, 2021 में दिल्ली में नाइट्रोजन क्साइड की मात्रा 125 फीसदी तक ज्यादा रही। ग्रामीण क्षेत्र में तो खेती में अंधाधुंध रासायनिक खाद के इस्तेमाल और पशुपालन आदि के कारण हवा में नाइट्रोजन क्साइड की मौजूदगी होती है, लेकिन बड़े शहरों में हवा में नाइट्रोजन क्साइड में वृद्धि का मूल कारण निरापद या ग्रीन μयूल कहे जाने वाले सीएनजी वाहन का उत्सर्जन है।

सैटेलाइट डाटा विश्लेषण  के जरिए तैयार की गई रिपोर्ट में सामन आए तथ्य

कार्बन डाई ऑक्साइड की तरह ही नुकसानदेह नाइट्रोजन के ऑक्सीजन के साथ गैसें, जिन्हें क्साइड फ नाइट्रोजन कहते हैं, मानव जीवन और पर्यावरण के लिए उतनी ही नुकसानदेह है, जितनी कार्बन डाई क्साइड। पर्यावरण मित्र कहे जाने वाले इस ईंधन से बेहद सूक्ष्म पर घातक 2.5 एनएम का उत्सर्जन पेट्रोल-डीजल वाहनों की तुलना में 100 से 500 गुना अधिक है, खासकर शहरी यातायात में, जहां वाहन बहुत धीरे-धीरे चलते हैं।

सीएनजी के प्रयोग से कार्बन मोनो क्साइड उत्सर्जन 5 गुना अधिक

भारत में सीएनजी वाहन उतनी ही मौत बांट रहे हैं, जितना डीजल वाहन। फर्क सिर्फ इतना है कि सीएनजी के प्रचलन से कार्बन के बड़े पार्टिकल कम हो गए हैं। यह सच है कि सीएनजी वाहन से अन्य ईधनों  की तुलना में पार्टिकुलेट मैटर 80 फीसदी और हाइड्रो कार्बन 35 प्रतिशत कम उत्सर्जित होता है, पर इससे कार्बन मोनो क्साइड उत्सर्जन 5 गुना अधिक है। शहरों में स्मॉग व वातावरण में ओजोन परत के लिए यह अधिक घातक है।

एक नजर में

􀂄 कैंसर, अल्जाइमर और लंग्स की बीमारियों को खुला न्यौता।

􀂄 ओजोन की परत को नष्ट कर रहे सीएनजी के महीन कण।

􀂄 सीएनजी के उपयोग से कार्बन मोनो क्साइड उत्सर्जन 5 गुना अधिक है।

􀂄 नाइट्रोजन क्साइड, पानी और ऑक्सीजन के साथ मिलकर तेजाबी बारिश कर सकती है।