सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण खारिज किया, कहा- यह 50% की सीमा का उल्लंघन करता है

 05 May 2021 11:39 AM

नई दिल्ली। महाराष्ट्र सरकार की ओर से दिए गए मराठा आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने आरक्षण पर सुनवाई करते हुए कहा है कि इसकी सीमा को 50 फीसदी से ज्यादा नहीं बढ़ाया जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने 1992 के इंदिरा साहनी केस में दिए गए फैसले की समीक्षा करने से भी इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह 50 फीसदी की सीमा का उल्लंघन करता है। कोर्ट ने कहा कि यह समानता के अधिकार का हनन है। इसके साथ ही कोर्ट ने 2018 के राज्य सरकार के कानून को भी खारिज कर दिया है।

दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने 50 फीसदी सीमा से बाहर जाते हुए मराठा समुदाय को नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण का ऐलान किया था। राज्य सरकार की ओर से 2018 में लिए गए इस फैसले के खिलाफ कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थीं, जिन पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। जस्टिस भूषण ने कहा कि वह इंदिरा साहनी केस पर दोबारा विचार करने का कोई कारण नहीं समझते। कोर्ट ने मराठा आरक्षण पर सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य सरकारों की ओर से रिजर्वेशन की 50 पर्सेंट लिमिट को नहीं तोड़ा जा सकता।