अदालत में होने वाली हर बात को मीडिया रिपोर्ट करे, ताकि न्यायाधीश गरिमा से अदालती कार्यवाही करें : सुप्रीम कोर्ट

 04 May 2021 01:29 AM

नई दिल्ली। मद्रास हाईकोर्ट की टिप्पणी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे निर्वाचन आयोग की याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एम आर शाह की पीठ ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया। हालांकि, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अदालतों में खुले संवाद होने चाहिए। इस दौरान कोर्ट द्वारा की गई मौखिक टिप्पणियों की रिपोर्टिंग से हम मीडिया को नहीं रोक सकते हैं और न ही हाईकोर्ट को यह सकते हैं कि वह सवाल न पूछे। इससे उनका मनोबल गिर सकता है। दरअसल, पिछले दिनों मद्रास हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग को कोविड की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार ठहराया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि इसके अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा चलना चाहिए। यह खबर प्रकाशित होने के बाद निर्वाचन आयोग ने ऐसी टिप्पणियों की रिपोर्टिंग रोकने की मांग की थी।

आयोग की याचिका पर शीर्ष अदालत ने दिखाया आईना

􀂄 मीडिया और हाईकोर्ट दोनों लोकतंत्र का महत्त्वपूर्ण स्तंभ हैं। हालांकि, हम निर्वाचन आयोग की दलील कि मद्रास हाईकोर्ट द्वारा उसके खिलाफ लगाए गए सख्त आरोप अनावश्यक थे इस पर गौर करेंगे। दोनों के बीच संतुलन बनाएंगे।

􀂄 अदालती कार्यवाहियों में की गई टिप्पणियों की रिपोर्टिंग से मीडिया को रोकने की याचिका अस्वाभाविक है। हम यह नहीं कह सकते कि मीडिया अदालत की चर्चाओं पर रिपोर्टिंग न करे, क्योंकि यह भी जनहित में है।

􀂄 हमें सुनिश्चित करना होता है कि अदालत में होने वाली हर बात को मीडिया रिपोर्ट करे, ताकि न्यायाधीश गरिमा से कार्यवाही करें।

􀂄 हाईकोर्ट की टिप्पणी चर्चा के आवेग में एकदम कह दी गई। यह उसके आदेश में नहीं था। आयोग को टिप्पणियों से परेशान नहीं होना चाहिए।

􀂄 न्यायाधीश वकीलों की प्रतिक्रिया के लिए सवाल पूछते हैं और इसका यह मतलब नहीं होता कि अदालत उस व्यक्ति या निकाय के खिलाफ है।

पीठ ने कहा - कुछ टिप्पणियां बड़े जनहित में की जाती हैं। कई बार यह इसलिए की जाती हैं कि व्यक्ति उस काम को करे, जो उसे करना है। हम हाईकोर्टों का मनोबल ये कहकर नहीं गिरा सकते कि सवाल न पूछें। वे लोकतंत्र का महत्त्वपूर्ण स्तंभ हैं।