खौफनाक इंदौर: 4 दिन में 2900 से ज्यादा कोरोना संक्रमित, रिकॉर्ड 12 मौतें; 4 महीने के अंतराल में फिर एक्टिव केस 5 हजार पार

 05 Apr 2021 08:50 PM

इंदौर। मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमण का सबसे तेज संक्रमण इंदौर में हो रहा है। कम्यूनिटी स्प्रेड की तरफ तेजी से बढ़ रहे हॉट स्पॉट इंदौर में अप्रैल के शुरूआती पांच दिन में ही रिकॉर्ड 2915 नए मरीज सामने आए हैं। संक्रमितों का आंकड़ा 700 पार हर दिन जा रहा है। एक्टिव केस की संख्या पांच हजार के पार हो गई है।  यहां 5589 एक्टिव केस हैं। जो इंदौर के 13 महीने के कोरोनाकाल में अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है। इसके पहले एक्टिव केस 9 दिसंबर को सबसे ज्यादा 5175 दर्ज किए गए थे।

इंदौर में 4 दिन में कुल 18497 सैंपल जांचे गए हैं। इस अवधि में संक्रमण दर 15.75% जा पहुंची है। चार दिनों में 12 रोगियों की मौतें दर्ज की गई हैं। सोमवार को 3 मौतें होना बताया। हालांकि मुक्तिधाम और कब्रिस्तानों में  ज्यादा शव पहुंच रहे हैं। इनमें से कई रोगी अस्पताल और जांच से पहले ही दम तोड़ने वाले हैं। अस्पतालों में मरीजों की संख्या अधिक होने पर सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था गड़बड़ा गई है। सुपर स्पेशलिटी में कमर्चारियों की संख्या बढ़ाई जा रही है। इसके लिए एक निजी कंपनी के 100 से ज्यादा कमर्चारियों को प्रशिक्षित कर यहां काम पर रखा जाएगा तो वहीं मरीजों से परिजनों को बात करने के लिए एक बार फिर वीडियो कॉल की सुविधा शुरू की गई है।

तारीख संक्रमित टेस्ट मौत
1 अप्रैल 682 4246 3
2 अप्रैल 708 3867 4
3 अप्रैल 737 4727 2
4 अप्रैल 788 5657 3

5500 बिस्तरों का इंतजाम, 1500 और बढ़ाएंगे 
संक्रमितों में रिकॉर्ड इजाफा होने से अस्पतालों में बिस्तरों की स्थिति का हिसाब गड़बड़ा गया है। बिस्तरों की संख्या बढ़ाकर 5500 से अधिक कर दी गई है, जो फरवरी में 930 थी। नवनिर्मित सरकारी सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल को एक बार फिर संक्रमित रोगियों के उपचार के लिए खोला गया है। सीएमएचओ बी एस सेत्या के अनुसार बिस्तरों की संख्या 7000 तक ले जा रहे हैं। वैक्सीनेशन भी ज्यादा से ज्यादा लोगों का किए जाने के प्रयास हैं।

आइसोलेशन गाइडलाइन में परिवर्तन, डे केयर भी शुरू
अस्पतालों में बिस्तर खाली करने के लिए होम आइसोलेशन की गाइडलाइन में भी परिवर्तन किया गया है। अब 60 वर्ष से अधिक आयु के बिना गंभीर बीमारी के बुजुर्ग भी होम आइसोलेशन में चिकित्सीय निगरानी में रह सकते हैं। सरकारी अस्पतालों में भर्ती स्थिर मरीजों को भी एमवाय में डे केयर में रेमडिसिविर जैसे कारगर माने जा रहे इंजेक्शन लगाकर डिस्चार्ज किया जा रहा है।