शाजापुर में लॉकडाउन में छात्रावास हुआ बंद तो अधीक्षक ने बना दिया प्याज गोदाम; सुरक्षित रखने के लिए हर कमरे में पंखे लगे

 10 Jun 2021 08:26 PM

शाजापुर। मध्यप्रदेश के शाजापुर में आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित जनजातीय सीनियर बालक छात्रावास बच्चे ना होने से प्याज का गोदाम और तबेला बन गया है। यह पूरा कारनामा वहां पदस्थ अधीक्षक कमल बोडाना के द्वारा करना बताया गया। बड़ी बात तो यह सामने आई कि प्याज का स्टाॅक बड़ी मात्रा में किया गया और वह खराब न हो, इसके लिए सरकारी बिजली का उपयोग कर एग्जॉस्ट फैन भी लगा दिए।

छात्रावास परिसर को तबेला भी बना दिया। यहां मवेशी भी बंधे दिखाई दिए। सरकारी भवन का निजी उपयोग करने की जानकारी सामने आने पर  पड़ताल शुरू की तो पता चला कि यह खेल कई दिनों से चल रहा था। बडी मात्रा में यहां प्याज स्टाॅक कर रखे गए। छात्रावास के तीन कमरों में तो प्याज भरे दिखाई दिए, जबकि शेष अन्य 4 कक्षों में पड़े प्याज के छिलके गवाही दे रहे थे कि यहां भी प्याज का स्टाॅक किया गया था। यहां का चौकीदार भी सकते में पड़ गया। प्याज के बारे में चौकीदार अशोक ने केवल इतना ही बताया यह प्याज अधीक्षक का है।

जनजातीय सीनियर बालक छात्रावास संक्रमण की पहली ही लहर में खाली होना शुरू हो गया था। बड़े परिसर में बने इस भवन में बच्चों के रहने के लिए 8 से 10 बड़े कमरे बने हुए हैं। सूत्रों के अनुसार इस भवन का गोदाम का उपयोग पहले लहसुन और बाद में प्याज का स्टाॅक करने के लिए कई दिनों से किया जा रहा था।

यहां के चौकीदार से पूछताछ की तो उन्होंने पहले तो बात करने से ही मना कर दिया लेकिन जब भवन में बने एक-एक कमरों को खोला तो पूरी हकीकत सामने आ गई। इस दौरान मौके से ही कमरों में प्याज के सवाल पर छात्रावास अधीक्षक कमल बोड़ाना को कोई मलाल नहीं दिखाई दिया। फोन पर अपनी गलती नहीं मानते हुए उन्होंने यह तर्क दे दिया कि मैंने प्याज बेच दिए हैं, जल्द ही खाली करा दूंगा।

पहले भी सामने आ चुके अवैध कब्जे के मामले..
सरकारी भवनों के खाली रहने पर निजी उपयोग करने का यह पहला मामला नहीं है, इसके पहले भी शाजापुर जिले के कई ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में भूसा भरने से लेकर मवेशियों को बांधने तक के मामले सामने आते रहे हैं, इसमें से एक बेरछा के पास और करेड़ी क्षेत्र में ऐसे ही मामले देखने को मिले थे।

उस समय भी बात करने पर जिम्मेदारों के गैर जिम्मेदाराना रवैया का खुलासा किया था। संक्रमण काल से पहले भी जिले के कई छात्रावासों में गड़बड़ी के मामले सामने आए थे।

शासकीय बिजली का भी उपयोग
छात्रावास में प्याज भरे होने से उन्हें सुरक्षित रखने के लिए 24 घंटे शासकीय बिजली का उपयोग किया जा रहा है। यहां पर एग्जास्ट फैन चलाए जा रहे हैं। छात्रावास को प्याज का गोडाउन बना दिया गया है। तस्वीर देखकर ऐसा लग रहा है यह छात्रावास नहीं प्याज का कोई भंडारण गृह है।

सबसे बड़ी बात तो यह है कि सरकारी बिल्डिंग में सरकारी छात्रावास में बच्चों की जगह उनके कमरे में प्याज भरा है और उस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों को इस मामले की जानकारी तक नहीं उन्होंने इन 2 सालों में छात्रावासों का निरीक्षण तक नहीं किया। इस मामले में जब हमने आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला अधिकारी निशा मेहरा से बात की तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस मामले की जानकारी तक नहीं है जब उनसे प्रश्न किया गया कि क्या कार्यवाही की जाएगी, तब भी उन्होंने यही कहा कि मामले को दिखाकर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी देखना यह है कि छात्रावास अधीक्षक कमल बढ़ाना के खिलाफ प्रशासन क्या कार्यवाही करता है।