बसंत पंचमी आज: जानें इसका महत्व, शुभ मुहूर्त, ध्यान मंत्र, पूजन की विधि, पौराणिक कथा और देवी का वाहन हंस क्यों है?

 16 Feb 2021 09:32 AM

नई दिल्ली। माघ मास शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि बसंत पंचमी के रूप में मनाई जाती है। हिन्दू मान्यता के अनुसार मां वाग्देवी (सरस्वती) की आराधना से बुद्धि की निर्मलता एवं विद्या की प्राप्ति होती है। ज्योतिष शास्त्र में मां सरस्वती के पूजन अर्चन का यह पर्व अबूझ मुहूर्त के नाम से भी जाना जाता है।

बसंत पंचमी का महत्व
बसंत पंचमी के सन्दर्भ में निर्णय सिन्धु ग्रन्थ में इस पर्व को श्रीपंचमी नाम से भी जाना जाता है। कामदेव के जन्म से इस तिथि का जुड़ाव जहां प्रकृति में श्री वृद्धि को करता है वहीं हमारे जीवन को बसंत के वैभव से परिपूर्ण करता है। बसंत जीवन में उमंग अर्थात हर्ष लाता है। इस तरह यह पर्व बसंत पंचमी, सरस्वती पंचमी या श्रीपंचमी के नाम से जनसामान्य में जाना जाता है। पुराणरामच्चय में उल्लेख है- 
माघ मासे सुरश्रेणे शुक्लायां पंचमी तिथौ। 
रति कामौ तु संपूज्य कर्तव्य समुहोत्सव:।। 
दानानि च प्रदेयानी येन तुष्यति माधव:।। 

पूजन हेतु शुभ मुहूर्त 
अबूझ मुहूर्त प्राय: उत्तरा भाद्र पद सूर्य नक्षत्र और रेवती बुध नक्षत्र में हर वर्ष बसंत पंचमी या सरस्वती जयंती आती है। श्री काशीस्थ गणेश आपा पंचांग के अनुसार आज प्रात: 04:44 बजे पंचमी तिथि लगेगी तथा अगले दिन 17 फरवरी को दिनभर रहेगी। इस प्रकार पंचमी तिथि 16 फरवरी को पूरे दिन रहेगी। प्रात: 10:54 बजे से 12:21 बजे एवं 12:21 बजे से 13:47 बजे मध्यान्ह में मां सरस्वती की आराधना उपासकों को एवं विद्या अर्जन कर रहे बालकों हेतु पूर्ण फलदायी होगी।

मां सरस्वती का ध्यान मंत्र

सर्वप्रथम सफेद पुष्प हाथ में लेकर निम्नलिखित मंत्र से भगवती सरस्वती का ध्यान करें- 
या कुन्देन्दु-तुषार-हार-धवला या शुभ्र-वस्त्रावृता।
या वीणा-वर-दण्ड-मण्डित-करा या श्वेत पद्मासना।।
या ब्राह्माच्युत-शंकर-प्रभृतिभिदेर्वै: सदा वन्दिता,
स मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेष जाड्यापहा:।। 
इसके बाद हाथ में लिया हुआ श्वेत पुष्प मां सरस्वती की चौकी पर अर्पित कर दें और उच्चारण करें- ऐं सरस्वत्यै नम:, आवाहनार्थे पुष्पाणि समर्पयामी। 

पूजन की विधि
चौकी में रखी हुई मां सरस्वती की प्रतिमा में पीले रंग का वस्त्र अर्पित करें
मां शारदा को सफेद रंग के पुष्प, पीली मिठाई और अक्षत, रोली चंदन हल्दी तथा केसर आदि की तिलक अर्पित करें। 
संगीत आदि वाद्य यंत्र एवं किताबों पर पुष्पादि अर्पित करें।
मां शारदा की वन्दना/प्रार्थना करें। 
या देवी सर्वभूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:।।

पौराणिक कथा
मां सरस्वती को विद्या की अधिष्ठात्री देवी के रूप में जाना जाता है, वे ब्रह्म देव की पुत्री हैं। इस जगत में विद्या विहीनता की स्थिति को देख ब्रह्म देव ने अपने कमण्डल से जल निकालकर जब प्रोक्षण किया तो सुन्दर कन्या के रूप में एक देवी उत्पन्न हुईं। जिनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी तीसरे हाथ में स्फटिक माला एवं चौथे हाथ में वर (अभय) मुद्रा सुशोभित हो रही थी। मां सरस्वती के वीणा वादन से संसार में आनन्द रस उत्पन्न हुआ। इस सुअवसर के समय बसंत पंचमी का पर्व ही था। तभी से देवलोक से मृत्यु लोक पर्यन्त मां सरस्वती की उपासना होने लगी। ज्ञान के आराधना का जीवन में आनन्द की प्राप्ति का वैभवपूर्ण पर्व है बसंत उत्सव। अत: ठीक ही कहा गया है- मीन मेषे बसन्तम्।

वसंत पंचमी पर देवी सरस्वती की द्वादश नामावली का पाठ करना चाहिए। ये है द्वादश नामावली...

प्रथम भारती नाम द्वितीयं सरस्वती।
तृतीयं शारदा देवी चतुर्थं हंसवाहिनी।।
पंचमं जगती ख्याता षष्ठं वागीश्वरी तथा।
सप्तमं कुमुदी प्रोक्ता अष्टमं ब्रह्मचारिणी।।
नवमं बुद्धिदात्री च दशमं वरदायिनी।
एकादशं चंद्रकान्तिर्द्वादशं भुवनेश्वरी।।
द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं च: पठेन्नर:।
जिह्वाग्रे वसते नित्यं ब्रह्मरूपा सरस्वती।।

देवी सरस्वती का वाहन हंस क्यों है?
हंस सरस्वती का वाहन है, इस संबंध में एक बात समझनी चाहिए कि ये प्रतीकात्मक है। यहां वाहन होने का अर्थ ये नहीं है कि देवी उस पर विराजमान होकर ही कहीं आवागमन करती हैं। यह एक संदेश है। हंस को विवेक का प्रतीक माना जाता है। संस्कृत साहित्य में नीर-क्षीर विवेक का उल्लेख है। इसका अर्थ होता है- दूध का दूध और पानी का पानी करना। यह क्षमता हंस में होती है।

हंस का रंग शुभ्र यानी सफेद होता है। यह रंग पवित्रता और शांति का प्रतीक है। शिक्षा प्राप्ति के लिए पवित्रता सबसे ज्यादा जरूरी है। पवित्रता से श्रद्धा और एकाग्रता बढ़ती है। शिक्षा से ज्ञान और ज्ञान से सही-गलत यानी शुद्ध-अशुद्ध को समझने की बुद्धि मिलती है। इसे ही विवेक कहते हैं।

जो पवित्रता और श्रद्धा से ज्ञान की प्राप्ति करेगा, उसी पर सरस्वती की कृपा होगी। सरस्वती की पूजा के फल में हमें विवेक मिलता है और भक्त हंस की तरह सही-गलत का भेद करने में सक्षम हो जाता है। सरस्वती का वाहन हंस का संदेश ये है कि हम ज्ञान प्राप्त करें और सही काम करके इस जीवन को सफल करें।