गुरु गोविंद सिंह की जयंती आज: प्रकाश पर्व पर जानिए उनके अनमोल वचन

 20 Jan 2021 10:50 AM

आज 20 जनवरी को प्रकाश पर्व है। सिख धर्म के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी की जयंती को उल्लास और उमंग के साथ प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, गुरु गोविंद सिंह का जन्म पौष महीने की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को बिहार राज्य की राजधानी पटना में हुआ था। परोपकार और त्याग का जीता जागता उदाहरण अगर दुनिया को कहीं मिला तो वो था गुरु गोविंद सिंह के जीवन में।  

वो एक आध्यात्मिक गुरु थे। जिन्होंने हमेशा लोगों को मानवता, शांति, प्रेम, करुणा, एकता और समानता की सीख दी। धन-संपदा, यश या राजसत्ता की प्राप्ति से दूर उन्होंने अन्याय, अधर्म, अत्याचार और दमन के खिलाफ लड़ाईयां लड़ अपना जीवन सार्थक बनाया। गुरु गोविंद सिंह ने ही खालसा पंथ की स्थापना की थी। गुरु पर्व के अवसर पर आइए जानते हैं गुरु गोविंद सिंह जी के कुछ अनमोल वचन, जो आज भी उतने ही सार्थक है जितने पहले थे।  

  • काम में खूब मेहनत करें और काम को लेकर किसी तरह की आलस्यपन न करें।
  • दुश्मन का सामना करने से पहले साम, दाम, दंड और भेद का सहारा लें, और अंत में ही आमने-सामने के युद्ध में पड़ें हमेशा जरूरतमंद व्यक्तियों की मदद जरूर करें।
  • किसी की चुगली-निंदा से बचें और किसी से ईर्ष्या करने के बजाय मेहनत करें।
  • खुद को सुरक्षित रखने के लिए नियमित व्यायाम और घुड़सवारी की अभ्यास जरूर करें।
  • अच्छे कर्मों से ही आप ईश्वर को पा सकते हैं। अच्छे कर्म करने वालों की ही ईश्वर मदद करता है।
  • जो कोई भी मुझे भगवान कहे, वो नरक में चला जाए।
  • मुझे उसका सेवक मानो। और इसमें कोई संदेह मत रखो।
  • जब बाकी सभी तरीके विफल हो जाएं, तो हाथ में तलवार उठाना सही है।
  • असहायों पर अपनी तलवार चलाने के लिए उतावले मत हो, अन्यथा विधाता तुम्हारा खून बहायेगा।
  • हमें सबसे महान सुख और स्थायी शांति तभी प्राप्त हो सकती है जब हम अपने भीतर से स्वार्थ को समाप्त कर देते है।
  • मेरी बात सुनो जो लोग दुसरे से प्रेम करते है वही लोग प्रभु को महसूस कर सकते है।
  • अज्ञानी व्यक्ति पूरी तरह से अँधा होता है वह गहना के मूल्य की सराहना नही करता है बल्कि उसके चकाचौंध की तारीफ करता है।