22 से 28 तक होलाष्टक, जानें क्यों होते हैं इस समय शुभ कार्य वर्जित

 15 Mar 2021 04:15 PM

उज्जैन। होली से पहले लगने वाला होलाष्टक इस साल 22-28 मार्च तक है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से होलिका दहन तक की अवधि को होलाष्टक कहा गया है। होलाष्टक के दौरान शुभ कार्य जैसे शादी-विवाह, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश, भवन निर्माण और नया व्यवसाय आदि मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। 
ग्रहों के कारण होती है शुभ कार्यों पर रोक : ज्योतिष के अनुसार हालाष्टक के दौरान ग्रहों का योग लोगों की सही निर्णय लेने की क्षमता को कम करता है। ऐसे में गलत फैसले होने की आशंका होती है., इसलिए इस समय शुभ कार्यों को नहीं किया जाता है। ज्योतिषीय गणना बताती है कि अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु उग्र स्वभाव के होते हैं। 
पौराणिक कथा : होलाष्टक में शुभ कार्यों पर रोक पौराणिक कथा से भी जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि कामदेव ने भगवान शिव की तपस्या भंग कर दी थी। इससे नाराज होकर उन्होंने फाल्गुन की अष्टमी तिथि के दिन भस्म कर दिया था। इसके बाद रति (कामदेव की पत्नी) ने शिव से कामदेव को पुनर्जीवित करने की याचना की। रति की प्रार्थना को शिव ने स्वीकार कर लिया। लेकिन कामदेव को भस्म करने के कारण भी 8 दिन शुभ कार्य वर्जित होते हैं।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त : इस बार होली मार्च 28, 2021 को दोपहर 03:27 बजे शुरू होगी और फिर मार्च 29, 2021 को 00:17 बजे समाप्त होगी। होलिका दहन 28 मार्च को है। इसका मुहूर्त कुल 2 घंटे 20 मिनट का है। होलिका दहन रविवार, मार्च 28, 2021 को शाम  18:37 से 20:56 से बीच किया जाना शुभ रहेगा।