होलिकाष्टक कल से शुरू होंगे, 28 मार्च तक नामकरण, मुंडन, गृह प्रवेश पर रोक रहेगी

 21 Mar 2021 08:52 PM

जबलपुर। फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि (22 मार्च) से होलिकाष्टक शुरू हो जाएंगे। इनदिनों में शुभ काम नहीं किए जाते हैं। होलिका दहन के बाद फिर से शुभ और मांगलिग कार्य शुरू हो जाते हैं। होलिकाष्टक होली दहन से पहले के 8 दिनों को कहा जाता है। इस बार सोमवार से 28 मार्च तक होलाष्टक रहेगा। इस वर्ष होलिका दहन 28 मार्च को किया जाएगा और इसके बाद अगले दिन रंगों वाली होली खेली जाएगी।

ज्योतिषार्यों के अनुसार होलिकाष्टक के दौरान शादी-विवाह, मांगलिक कार्य, नया व्यवसाय या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए। साथ ही होलिकाष्टक में 16 संस्कार जैसे मुंडन, नामकरण जनेऊ संस्कार, गृह प्रवेश, विवाह संस्कार आदि पर रोक लग जाती है। किसी भी प्रकार का हवन, यज्ञ कर्म भी इनदिनों में नहीं किया जाता है। इसके अलावा नव-विवाहिताओं को इन दिनों में मायके में रहने की सलाह दी जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार होलिकाष्टक के 8 दिवस में ग्रह, उग्र रहते हैं। इन 8 दिवसों में अष्टमी को चंद्रमा,नवमी को सूर्य, दशर्मी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध,चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु उग्र हो जाते हैं। जिसके कारण इस अवधि में शुभ कार्य करने वर्जित हैं।

होलाष्टक की कथा
शास्त्रों के अनुसार भक्त प्रहलाद को उसके पिता ने हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र की भक्ति को भंग करने और उनका ध्यान अपनी और करने के लिए लगातार 8 दिनों तक उन्हें हर सम्भव यातनाएं और कष्ट दिए थे। भक्त प्रह्लाद ने उस दौरान श्री हरि का ध्यान किया व अंत में उनके दर्शन प्राप्त किए।  यह समय श्री हरि विष्णु का ध्यान करने का माना जाता है। इसलिए कहा जाता है कि, होलाष्टक के इन 8 दिनों में किसी भी तरह का कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। यह 8 दिन वहीं होलाष्टक के दिन है। होलिका दहन के बाद ही जब प्रहलाद जीवित बच जाते हैं तो उनकी जान बच जाने की खुशी में ही दूसरे दिन रंगों की होली मनाई जाती है।