कुंभ संक्रांति कल: सूर्य मकर से निकलकर कुंभ राशि में करेगा प्रवेश

 11 Feb 2021 02:35 PM

नई दिल्ली। कल यानी शुक्रवार को सूर्य मकर से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएगा। इस दिन कुंभ संक्रांति पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिष और धर्म ग्रंथों में बताया गया है कि जिस दिन सूर्य एक राशि से दूसरी में जाता है। उस दिन को संक्रांति पर्व कहा जाता है। ये साल में 12 बार मनाया जाता है। संक्रांति पर्व पर सूर्योदय से पहले उठकर तीर्थ-स्नान और फिर उगते हुए सूरज को अर्घ्य देने की परंपरा है। इस दिन श्रद्धा के मुताबिक, जरूरतमंद लोगों को खाना और कपड़ों का दान भी दिया जाता है। 

पुराणों में भगवान सूर्य, शिव, विष्णु, गणेश और देवी दुर्गा को पंचदेव कहा गया है। ब्रह्मवैवर्त और स्कंद पुराण में बताया गया है कि इन देवी-देवताओं की पूजा करने हर तरह के दोष और पाप खत्म हो जाते हैं। इन 5 को नित्य देवता और मनोकामना पूरी करने वाला भी कहा गया है। इसलिए हर महीने में जब सूर्य राशि बदलता है तब उस दिन संक्रांति पर्व मनाते हुए भगवान सूर्य की विशेष पूजा की जाती है।

सूर्य देवता को ही ज्योतिष का जनक माना गया है। सूर्य ही सभी ग्रहों का राजा है। इस ग्रह की स्थिति से ही कालगणना की जाती है। दिन-रात से लेकर महीने, ऋतुएं और सालों की गणना सूर्य के बिना नहीं की जा सकती। हर महीने जब सूर्य राशि बदलता है तो मौसम में बदलाव होने लगते हैं। जिससे ऋतुएं भी बदलती हैं। इसी वजह से सूर्य की स्थिति महत्वपूर्ण मानी जाती है।

एक साल में 12 संक्रांति होती हैं। सूर्य सभी 12 राशियों में घूमता है। जब ये ग्रह एक से दूसरी राशि में जाता है तो इसे संक्रांति कहते हैं। जिस राशि में सूर्य आता है उसी के नाम से संक्रांति होती है। जैसे मकर राशि में जाने पर मकर संक्रांति और तकरीबन उसके एक महीने जब कुंभ में प्रवेश करेगा तो कुंभ संक्रांति मनाई जाती है। 12 फरवरी को सूर्य का राशि परिवर्तन होने से इस दिन भगवान सूर्य की विशेष पूजा करनी चाहिए साथ ही इस दिन स्नान-दान जैसे शुभ काम करने की भी परंपरा ग्रंथों में बताई गई है।