नवरात्र के 9 दिनों से संबंधित इन दिव्य गुणों वाली नौ औषधियों के बारे में यहां जानें

 16 Oct 2020 12:09 PM  615

उज्जैन। हमारी संस्कृति और धर्म ने हमें पूर्णत: की ओर जाने का रास्ता बताया है। इस पूर्णत: को पाने का सबसे अच्छा रास्ता धर्म और सेहत दोनों से होकर गुजरता है। नवरात्र मां की आराधना में लीन होने वाले दिन हैं साथ ही भक्ति के यह दिन हमें उन औषधियों की जानकारी भी देते हैं जो हमें जीवन और सेहत की कई तरह की समस्याओं से निजात दिलाती हैं। देवी के नौ रूप हैं, उसी तरह प्रकृति ने हमें नौ औषधियां भी दी हैं जिनको देवी का रूप माना जाता है। इन औषधियों में हमारी सेहत और मनोविकारों को ठीक करने की अद्भुत क्षमता है। इन नौ औषधियों को दुर्गाकवच कहा जाता है, क्योंकि माना जाता है कि यह औषधियां रोगों को हरने वाली और उनसे बचाकर रखने के लिए एक कवच के रूप में कार्य करती हैं। 
जानें इन औषधियों के बारे में...


प्रथम देवी शैलपुत्री - औषधि हरड़
दुगार्जी के पहले रूप को शैलपुत्री के नाम से जाना जाता हैं। ये ही नवदुगार्ओं में प्रथम हैं और कई प्रकार की समस्याओं में काम आने वाली औषधि हरड़ को देवी शैलपुत्री का ही एक रूप माना जाता है। यूनानी चिकित्सा पद्धति में इसका इस्तेमाल एंटीटॉक्सिन के रूप में, कंजक्टीवाइटिस, गैस्ट्रिक समस्याओं, पुराने और बार-बार होने वाले बुखार, साइनस, एनीमिया और हिस्टीरिया के इलाज में किया जाता है।

द्वितीय ब्रह्मचारिणी - औषधि ब्राह्मी
देवी का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी है। इस रूप से जुड़ी औषधि को ब्राह्मी के  नाम से जाना जाता है। इस औषधि को मस्तिष्क का टॉनिक कहा जाता है। ब्राह्मी मन, मस्तिष्क और स्मरण शक्ति को बढ़ाने वाले के साथ रक्त संबंधी समस्याओं को दूर करने और और स्वर को मधुर करने में मदद करती है। इसके अलावा यह गैस व मूत्र संबंधी रोगों की प्रमुख दवा है। यह मूत्र द्वारा रक्त विकारों को बाहर निकालने में समर्थ औषधि है। 
 

तृतीय चंद्रघंटा - औषधि चन्दुसूर
मां दुर्गा की तृतीय शक्ति का नाम चंद्रघंटा है और इनसे जुड़ी औषधि चन्दुसूर है। यह एक ऐसा पौधा है जो धनिये के जैसा होता है। इस पौधे की पत्तियों की सब्जी बनाई जाती है। इस पौधे में कई औषधीय गुण हैं। इससे मोटापा दूर होता है। यह शक्ति को बढ़ाने वाली और हृदयरोग को ठीक करने वाली चंद्रिका औषधि है। इसलिए इस बीमारी से संबंधित लोगों को मां चंद्रघंटा की पूजा और प्रसाद के रूप में चंदुसूर ग्रहण करना चाहिए।


चतुर्थ कुष्माण्डा -औषधि पेठा
नवरात्र के चौथे दिन मां भगवती दुर्गा के कुष्माण्डा स्वरूप की पूजा की जाती है। देवी के इस रूप से जुड़ी औषधि है कुम्हड़ा। यह हृदयरोगियों के लिए लाभदायक, कोलेस्ट्रॉल को कम करने वाला, ठंडक पहुंचाने वाला होता है। यह पेट की गड़बड़ियों में भी असरदायक होता है। रक्त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित कर अग्न्याशय को सक्रिय करता है। मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति के लिए यह अमृत समान है। इन बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को पेठा के उपयोग के साथ कुष्माण्डा देवी की आराधना करनी चाहिए।


पंचम स्कंदमाता - औषधि अलसी
नवरात्रि का पांचवां दिन स्कंदमाता की उपासना का दिन होता है। यह औषधि के रूप में अलसी में विद्यमान हैं। यह वात, पित्त, कफ, रोगों की नाशक औषधि है। अलसी में कई सारे महत्वपूर्ण गुण होते हैं। अलसी का रोज सेवन करने से आप कई रोगों से छुटकारा पा सकते हैं। सुपर फूड अलसी में ओमेगा 3 और फाइबर बहुत अधिक मात्रा में होता है। यह रोगों के उपचार में लाभप्रद है और यह हमें कई रोगों से लड़ने की शक्ति देता है। कफ प्रकृति और पेट से संबंधित समस्याओं से ग्रस्त लोगों को स्कंदमाता की आराधना और अलसी का सेवन करना चाहिए।


षष्ठम कात्यायनी - औषधि मोइया

नवदुर्गा का छठा रूप कात्यायनी की उपासना का होता है। देवी के इस रूप से जुड़ी औषधि का नाम है मोइया। इसे माचिका भी कहते हैं। यह कफ, पित्त, अधिक विकार और गले के रोगों का नाश करती है। इससे ग्रस्त लोगों को इसका सेवन व कात्यायनी की आराधना करना चाहिए।


सप्तम कालरात्रि - औषधि नागदौन
श्री दुर्गा का सप्तम रूप श्री कालरात्रि हैं। ये काल का नाश करने वाली हैं। यह नागदौन औषधि के रूप में जानी जाती हैं। जो भक्त मन या मस्तिष्क के किसी रोग से पीड़ित है उसे नागदौन औषधि को लेना चाहिए। इस औषधि का इतना प्रभाव होता है कि यदि इसे अपने घर में लगा लिया जाए तो घर के सभी सदस्यों से कई छोटी-छोटी मौसमी बीमारियां हमेशा दूर ही रहेगी।

अष्टम महागौरी - औषधि तुलसी
नवदुर्गा का अष्टम रूप महागौरी है। देवी औषधि के रूप में तुलसी में विराजमान हैं।  तुलसी को घर में लगाकर इसकी पूजा की जाती है। पौराणिक महत्व से अलग तुलसी एक जानी-मानी औषधि भी है, जिसका इस्तेमाल कई बीमारियों में किया जाता है। तुलसी कई प्रकार की होती है और तुलसी के सभी प्रकार रक्त को साफ एवं हृदय रोग का नाश करती है। इ

नवम सिद्धिदात्री यानी शतावरी
मां दुर्गा अपने नौवें स्वरूप में सिद्धिदात्री के नाम से जानी जाती है। ये सभी प्रकार की सिद्धियां देने वाली हैं। दुर्गा के इस स्वरूप को नारायणी या शतावरी कहते हैं। शतावरी बुद्धि बल और वीर्य के लिए उत्तम औषधि है। यह रक्त विकार एवं वात पित्त शोध नाशक और हृदय को बल देने वाली महाऔषधि है।