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12 साल की उम्र में ऑटो ड्राइवर पिता की मदद के लिए उठाए तीर-कमान

 22 Jul 2021 01:28 AM

खरसावां (झारखंड)। ओलिंपिक तीरंदाजी में तीसरी बार देश का प्रतिनिधित्व कर रही दीपिका कुमारी को शुरुआती दिनों में काफी संघर्ष करना पड़ा था। विश्व की नंबर एक तीरंदाज दीपिका ने 12 साल की उम्र में इस खेल से जुड़ने का फैसला किया था। उस समय रांची के रातू में रहने वाली दीपिका खेलों से जुड़कर परिवार की आर्थिक मदद करना चाहती थी। उनके पिता ऑटो- चालक और मां नर्स का काम करती थी। 2006 में वह रिश्ते में बहन दीप्ति कुमारी को लोहरदगा में तीरंदाजी करते देख उन्होंने भी इस खेल से जुड़ने का फैसला किया। रांची लौटकर पिता शिवनारायण और मां गीता माहतो उन्हें अर्जुन मुंडा अकादमी लेकर गए। ट्रायल के बाद उन्हें अकादमी में जगह नहीं मिली, लेकिन 3 महीने में खुद को साबित करने की चुनौती ली और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

18 साल की उम्र में बनीं नंबर वन तीरंदाज

2010 के कॉमनवेल्थ खेलों में दीपिका ने व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड जीतने के साथ ही महिला रिकर्व टीम को भी चैम्पियन बनाया था। मई 2012 में दीपिका ने अंताल्या में आयोजित वर्ल्ड कप के व्यक्तिगत रिकर्व इवेंट में पहली बार स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। इसके बाद दीपिका महज 18 साल की उम्र में महिला रिकर्व रैंकिंग में नंबर वन पर पहुंच गईं थीं। जुलाई 2013 में उन्होंने कोलंबिया में तीरंदाजी विश्व कप में भी स्वर्ण पदक जीता। दीपिका अब तक विश्व कप प्रतियोगिताओं में 9 स्वर्ण, 12 रजत और 7 कांस्य पदक जीत चुकी हैं। दीपिका ने 2019 में बैंकॉक में हुई एशियाई तीरंदाजी चैंपियनशिप के जरिए टोक्यो ओलंपिक का टिकट हासिल किया था। उन्होंने इसी चैंपियनशिप में पति अतनु दास के साथ मिक्स्ड डबल में कांस्य जीतकर ओलंपिक कोटा हासिल किया।

दीपिका का हालिया प्रदर्शन

दीपिका कुमारी ने पेरिस में आयोजित हुए तीरंदाजी वर्ल्ड कप स्टेज-3 टूर्नामेंट में एक दिन में देश को 3 गोल्ड दिलाए। सबसे पहले उन्होंने अतनु दास के साथ मिलकर मिश्रित युगल इवेंट में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद दीपिका के नेतृत्व में ही महिला रिकर्व टीम ने स्वर्ण पदक जीता। फिर दीपिका ने महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा के फाइनल में रूस की एलिना ओसिपोवा को मात देकर स्वर्ण पदकों की हैट्रिक पूरी की। इस शानदार प्रदर्शन के बाद वह विश्व रैंकिंग में एक बार फिर नंबर वन पायदान पर पहुंच गईं।