लापरवाही से टूटा बायो बबल, IPL में अब खेला न होबे

 05 May 2021 01:41 AM

नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण के चलते आईपीएल का 14वां सीजन टाल दिया गया है। बीसीसीआई के वाइस प्रेसिडेंट राजीव शुक्ला ने मंगलवार दोपहर 1.15 बजे इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि फिलहाल टूर्नामेंट को सस्पेंड कर दिया है। हम देखेंगे कि इसे आगे पूरा कराया जा सकता है, या नहीं। बयान से जाहिर है कि बचे हुए 31 मैच री-शेड्यूल किए जा सकते हैं। फिलहाल बीसीसीआई के सामने विदेशी खिलाड़ियों को उनके देश भेजने की चुनौती है। क्योंकि, यूएई और आस्ट्रेलिया जैसे देशों ने भारत से आने वाली उड़ानों पर रोक लगा दी है। पिछले 2 दिन में 3 फ्रेंचाइजी के 4 खिलाड़ी और 1 स्टाफ के कोरोना संक्रमित होने के बाद बीसीसीआई ने यह फैसला लिया। सूत्रों के मुताबिक अभी और मामले आ सकते हैं। सोमवार को केकेआर के वरुण चक्रवर्ती और संदीप वॉरियर पॉजिटिव आए थे। सीएसके के बॉलिंग कोच लक्ष्मीपति बालाजी और दो अन्य स्टाफ भी संक्रमित हुए थे। मंगलवार को सनराइजर्स हैदराबाद के ऋद्धिमान साहा और दिल्ली कैपिटल्स के अमित मिश्रा भी संक्रमित हो गए। ऐसे में टीमों ने खुद को क्वारैंटाइन कर लिया है।

क्यों नहीं कैंसिल हो सकता आईपीएल?

आईपीएल से बीसीसीआई रेवेन्यू में बहुत फायदा हुआ है। इसका नतीजा यह हुआ कि इससे सरकार को समय पर टैक्स मिल रहा है। बीसीसीआई ने 2007-08 के बाद से 3500 करोड़ रुपए टैक्स के रूप में दिए हैं। आईपीएल से पहले तक बीसीसीआई को एक चैरिटेबल आर्गेनाइजेशन समझा जाता था। बीसीसीआई इस लीग से 40%रेवेन्यू जनरेट करता है। टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ल्ड क्रिकेट की इकोनॉमी लगभग 15 हजार करोड़ रुपए की है। इसमें 33%यानी 5 हजार करोड़ रुपए आईपीएल से आता है। यही कारण है कि बीसीसीआई को आईपीएल के दौरान दुनिया के अन्य बोर्ड का भी सहयोग मिल रहा है।

खिलाड़ियों को दी गई ट्रैकिंग डिवाइस खराब निकली

सीजन के बीच में खिलाड़ियों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने से बायो-बबल के ट्रैकिंग डिवाइस और कोरोना प्रोटोकॉल के नियमों को सख्ती से पालन कराने के लिए नियुक्त कोरोना अफसरों पर सवाल उठने लगे हैं। दरअसल, खिलाड़ी बायो बबल एरिया में रहें और जो एरिया निर्धारित की गई है, उससे बाहर न जाएं। इस पर नजर रखने के लिए सभी को ट्रैकिंग डिवाइस दी गई थी। यह डिवाइस रिस्ट बैंड की तरह थी। जिसे हमेशा खिलाड़ियों को होटल कमरे से बाहर निकलने पर पहनना जरूरी था। ये डिवाइस ब्लूटूथ के जरिए मोबाइल फोन में एक ऐप से जुड़ी रहती है। यह खिलाड़ियों को बायो बबल तोड़ने से रोकने में मददगार थी। इससे खिलाड़ियों को पता चलता कि उन्हें किन जगहों पर जाना है और कौन सी जगह बायो- बबल के तहत आती है। यह डिवाइस सेंट्रल पैनल से जुड़ा थी। इससे बोर्ड को पता चलता कि कौन से खिलाड़ी बायो-बबल का उल्लंघन कर रहे हैं।

कोरोना आफिसर प्रोटोकॉल का पालन नहीं करा पाए

यूएई में पहली बार बायो-बबल में आयोजित हुए आईपीएल के दौरान हर टीम के साथ 1 कोरोना आफिसर नियुक्त किया गया था। लेकिन, इस बार सभी टीमों के साथ चार-चार कोरोना आफिसर नियुक्त किए गए थे। ताकि टीमें बायो-बबल के नियमों का पालन करने में कोताही न बरतें, लेकिन चार खिलाड़ियों और एक कोच के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद कोरोना आफिसर की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

बीसीसीआई को 2000 करोड़ का नुकसान

आईपीएल को अगर इसे पूरी तरह रद्द कर दिया जाता है तो बोर्ड को करीब 2000 करोड़ का नुकसान होगा। साथ ही इस साल भारत की मेजबानी में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप पर भी खतरा मंडराने लगेगा। भारत से मेजबानी छीनी जा सकती है। इससे भी बीसीसीआई को करोड़ों का नुकसान होगा।