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मजदूर से तीरंदाज बने प्रवीण जाधव की नजरें पदक पर

 21 Jul 2021 01:30 AM

कोलकाता। सातारा के प्रवीण जाधव के पास बचपन में दो ही रास्ते थे , या तो अपने पिता के साथ दिहाड़ी मजदूरी करते या बेहतर जिंदगी के लिए ट्रैक पर सरपट दौड़ते लेकिन उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि ओलिंपिक में तीरंदाजी जैसे खेल में वह भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे । सातारा के सराडे गांव के इस लड़के का सफर संघर्षों से भरा रहा है । वह अपने पिता के साथ मजदूरी पर जाने भी लगे थे लेकिन फिर खेलों ने जाधव परिवार की जिंदगी बदल दी । परिवार चलाने के लिये उनके पिता ने कहा कि स्कूल छोड़कर उन्हें मजदूरी करनी होगी । एक दिन जाधव के स्कूल के खेल प्रशिक्षक विकास भुजबल ने उनमें प्रतिभा देखी और एथलेटिक्स में भाग लेने को कहा । जाधव ने कहा कि विकास सर ने मुझे दौड़ना शुरू करने के लिये कहा । उन्होंने कहा कि इससे जीवन बदलेगा और दिहाड़ी मजदूरी नहीं करनी पड़ेगी । मैने 400 मीटर दौड़ना शुरू किया । अहमदनगर के क्रीड़ा प्रबोधिनी हॉस्टल में वह तीरंदाज बने जब एक अभ्यास के दौरान उन्होंने दस मीटर की दूरी से सभी दस गेंद रिंग के भीतर डाल दी । उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।