मानवता शर्मसार, ऑटो में जन्मी लाड़ली, एंबुलेंस मिली न अस्पताल में इलाज

 23 Oct 2020 08:55 PM

श्योपुर।  मातृ शिशु मृत्युदर में कमी लाने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के प्रति जिले के जिम्मेदार कितने गंभीर हैं, इसका नजारा शुक्रवार को पाली रोड पर नर्सरी के सामने देखने को मिला। वहां रायपुरा से आई एक प्रसूता को सरकारी सुविधा नहीं मिलने से ऑटो में प्रसव के लिए मजबूर होना पड़ा। इससे पहले प्रसूता को जिला अस्पताल में स्टाफ ने बिना परीक्षण करे वापस लौटा दिया था। घर पहुंचने के बाद प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने इमरजेंसी सेवा 108 को कॉल किया, लेकिन 4 घंटे तक प्रसूता के दरवाजे पर एंबुलेंस नहीं पहुंची। 
शुक्रवार को पाली रोड नर्सरी के सामने एक ऑटो को कुछ  महिलाएं घेर कर खड़ी दिखीं। जानकारी लेने पर पता चला कि रायपुरा दलारना बगीची निवासी मौसमी पत्नी महावीर माहौर का प्रसव हो गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरोज शिवहरे ने सहायिका और परिजन महिलाओं की मदद से उसका प्रसव तो करा दिया, लेकिन नाल नहीं काटा। दोपहर करीब 3.30 बजे हुए प्रसव के एक घंटे बाद 4.15 बजे एक सरकारी गाड़ी पहुंची, जिसमें लादकर महिलाओं ने बमुश्किल प्रसूता को अस्पताल पहुंचाया। 

फिर सामने आई अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही :
जिला अस्पताल में प्रसूताओं के साथ होने वाली लापरवाही और परिजनों के साथ स्टाफ का दुर्वव्यहार आम बात हैं। इसकी बानगी शुक्रवार को भी देखने को मिली। प्रसूता मौसमी बाई को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरोज दोपहर 12 बजे जिला अस्पताल में परीक्षण कराने ले गई थी। मौके पर मौजूद स्टाफ ने जांच की औपचारिकता निभाए बिना प्रसूता को यह कहकर वापस लौटा दिया कि अभी प्रसव में समय है। घर पहुंचते ही प्रसूता को तेज दर्द शुरू हो गए। कार्यकर्ता और परिजनों ने 108 को फोन लगाया तो वहां से जवाब मिला कि सभी गाड़ियां खराब हैं, प्रसूता को अपने साधन से अस्पताल ले आओ। दोपहर करीब 3.30 बजे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ऑटो किराए से लेकर प्रसूता को जिला अस्पताल के लिए रवाना हुई, लेकिन रास्ते में ही प्रसव हो गया। इसके बाद कार्यकर्ता ने सीएमएचओ, डीपीओ और सीडीपीओ को फोन लगाकर जानकारी दी। सूचना के एक घंटे बाद सीडीपीओ भावना भावे की गाड़ी मौके पर पहुंची, जो प्रसूता को अस्पताल ले गई। 

ऑटो ड्राइवर ने दिखाई मानवता :
जहां अस्पताल प्रबंधन ने प्रसूता के मामले में घोर लापरवाही बरती, वहीं ऑटो चालक फिरोज खान ने मानवता दिखाई। श्योपुर से सोंई के लिए जा रहे फिरोज खान ने प्रसूता की हालत को देखते हुए सवारियों को दलारना बगीची पर छोड़ दिया और प्रसूता को अस्पताल के लिए लेकर रवाना हो गया। रास्ते में ऑटो में प्रसव होने पर भी फिरोज ने एक घंटे तक परिजनों की मदद अपने स्तर पर की और परिजनों से किराया भी नहीं लिया। 

- डीपीओ सर ने सीडीपीओ को फोन लगाकर गाड़ी भेजने को कहा था। जैसे ही सूचना मिली मैं गाड़ी लेकर आ गई। मुझे नहीं मालूम की प्रसूता को यहां एक घंटा हो गया है। 
भावना मिश्रा, सुपरवाइजर

- यह दलारना बगीची में तीसरा प्रसव है, जो आॅटो या सड़क पर हुआ है। हम जब भी फोन लगाते हैं, एंबुलेंस लेने नहीं पहुंचती है। मैंने आज सीएमएचओ, डीपीओ और सीडीपीओ को भी फोन लगाया लेकिन, तत्काल मदद नहीं मिल सकी। 
सरोज शिवहरे, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता 

- इस मामले की जानकारी लेकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी ताकि ऐसी स्थिति फिर से निर्मित न हो।
डॉ. आरबी गोयल, सिविल सर्जन, श्योपुर