मध्यप्रदेश: बैतूल का एक समाज करता है पांडवों के वंशज होने का दावा, कांटों की सेज पर लेटते हैं, जाने क्या है पौराणिक मान्यता

 26 Dec 2020 02:52 PM

बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के एक गांव में रहने वाले रज्जड़ समाज के कुछ लोग खुद को पांडवों का वंशज बताते हैं। यह लोग मन्नत पूरी करने के नाम पर कांटों पर लेटकर एक परंपरा निभाने का दावा भी करते हैं। बताया जाता है कि इस समाज के लोग कई साल से कांटों की सेज पर लेटने की परंपरा निभा रहे हैं। 

बैतूल जिले में सेहरा गांव में हर साल दिसंबर में रज्जड़ समाज के लोग कांटों की सेज पर लेटते हैं। इनका दावा है कि यह लोग पांडवों के वंशज हैं। उनका कहना है कि पांडवों ने इसी तरह से कांटों पर लेटकर सत्य की परीक्षा दी थी। ऐसे में रज्जड़ समाज वर्षों से इस परंपरा को निभा रहा है। 
समाज से जुड़े लोगों का मानना है कि वे कांटों की सेज पर लेटकर अपनी आस्था, सच्चाई और भक्ति की परीक्षा देते हैं। वे कहते हैं कि ऐसा करने से भगवान खुश होते हैं और उनकी मनोकामना भी पूरी होती है।

यह लोग अगहन मास में पूजा-अर्चना करते हैं। इसके बाद नुकीले कांटों वाली टहनियां तोड़कर लाते हैं, जिसके बाद उन टहनियों की भी पूजा होती है। यह कार्यक्रम होने पर ये लोग नंगे बदन इन कांटों पर लेट जाते हैं। उनका दावा है कि इस तरह वे सत्य और भक्ति की परीक्षा देते हैं।

क्या है मान्यता
रज्जड़ समाज के मुताबिक, इस मान्यता के पीछे एक कहानी है। इसमें बताया गया है कि एक बार पांडव पानी के लिए भटक रहे थे। बहुत देर बाद उन्हें नाहल समुदाय का एक व्यक्ति दिखाई दिया। पांडवों ने पानी का ठिकाना पूछा तो उसने पानी का स्रोत बताने से पहले पांडवों के सामने एक शर्त रख दी। नाहल समुदाय के उस शख्स ने कहा कि पानी का स्रोत बताने के बाद पांडवों को अपनी बहन की शादी नाहल से करानी होगी।

पुराणों के मुताबिक, पांडवों की कोई बहन नहीं थी। ऐसे में उन्होंने भोंदई नाम की एक लड़की को अपनी बहन बना लिया और पूरे रीति-रिवाज से उसकी शादी नाहल के साथ करा दी। विदाई के वक्त नाहल ने पांडवों को कांटों पर लेटकर सत्य की परीक्षा देने को कहा। ऐसे में सभी पांडव एक-एक करके कांटों पर लेट गए। रज्जड़ समाज के लोग खुद को पांडवों का वंशज बताते हैं और कांटों पर लेटकर परीक्षा देते हैं। यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है, जिसे निभाते वक्त समाज के लोगों में खासा उत्साह रहता है।