मंत्री विश्वास सारंग पहुंचे पीपुल्स हॉस्पिटल, कोरोना वैक्सीन लेने वाले वॉलेंटियर्स से की बात

 28 Nov 2020 04:55 PM

भोपाल। मंत्री विश्वास सारंग शनिवार को पीपुल्स हॉस्पिटल का निरीक्षण करने पहुंचे। यहां उन्होंने डॉक्टरों से कोरोना वैक्सीन के ट्रायल के बारे में जानकारी ली। मंत्री के सामने ही एक महिला को कोरोना की डोज दी गई। इसके बाद मंत्री सारंग काउंसलिंग रूम पहुंचे। यहां डॉक्टरों द्वारा एक वॉलेंटियर की काउंसलिंग की जा रही थी। मंत्री ने वॉलेंटियर से बातचीत भी की। उन्होेंने वॉलेंटियर से पूछा कि आपको इसके बारे में कैसे ज्ञात हुआ। वॉलेंटियर ने मंत्री को बताया...
मेरे छोटे भाई ने मुझे बताया था कि पीपुल्स हॉस्पिटल में कोरोना वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है। तो आप ट्रायल लेने चले जाओ। अगर मैं यहां पर होता तो जरूर जाता। मेरा भाई उज्जैन में रहता है। 
मंत्री- क्या करते हो आप?
वॉलेंटियर- मेरा फोर व्हीलर का वर्कशॉप है, मैं उसी में काम करता हूं। 
इसके बाद मंत्री सारंग ने एक और वॉलेंटियर से मुलाकात की। 
हॉस्पिटल में शुक्रवार से ही कोरोना वैक्सीन के तीसरे फेज का ट्रायल चल रहा है। 


शुक्रवार को सबसे पहले पटेल नगर में रहने वाले एक टीचर को पहली वैक्सीन दी गई। पहले दिन 100 लोगों को वैक्सीन देने का लक्ष्य था। हालांकि, कुछ ही लोगों को यह वैक्सीन लगाई गई। वॉलेंटियर्स के पहुंचने का सिलसिला आज भी जारी है। बागसेवनिया, कल्पना नगर, भवानी नगर, चूना भट्टी, होशंगाबाद रोड, सबरी नगर खेड़ी खेड़ी भानपुर से लोग पहुंचे हैं।
पहला टीका 47 वर्षीय एक टीचर को लगाया गया था। पीपुल्स समाचार से बातचीत में उन्होंने बताया था कि पीपुल्स समाचार से वैक्सीन के ट्रायल के बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद मैंने निर्णय लिया कि मैं वैक्सीन का पहला ट्रायल करवाऊंगा। जब तक परीक्षण नहीं होगा गुणवत्ता की जांच कैसे होगी।

1000 लोगों को लगाया जाएगा टीका
बीते दिनों से इसके लिए वॉलिंटियर्स का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि लगभग एक हजार करीब लोगों ने अपनी सहमति दे दी है,अब इन लोगों को वैक्सीन का टीका लगाया जाएगा।

100 फीसदी सही आ सकते हैं नतीजे
पीपुल्स मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ अनिल दीक्षित ने बताया था कि हमारे यहां को वैक्सीन के डोज पहुंच चुके हैं, भारत बायोटेक के एक प्रतिनिधि आए हुए हैं। हमारी उनसे तैयारियों को लेकर चर्चा हुई है। हम यहां ट्रायल कर रहे हैं। भारत बायोटेक कंपनी ने कोरोना वैक्सीन बनाने के लिए आईसीएमआर से मंजूरी ली है। इसके लिए वह जिन वॉलिंटियर्स का चुनाव कर रही है उसके लिए शर्त है कि व्यक्ति कभी भी कोरोनावायरस का शिकार ना हुआ हो। कंपनी की इस पॉलिसी को कुछ विशेषज्ञ ऐसा मान रहे हैं कि इससे वैक्सीन के नतीजे 100 फीसदी सही आ सकते हैं।

वॉलेंटियर्स को टीके के बाद 750 रुपए भी प्रदान किए जाएंगे। यह प्रोत्साहन राशि के तौर पर होगी। इसके बाद प्रति सप्ताह इनके स्वास्थ्य की निगरानी भी की जाएगी। कुल एक हजार डोज मिले हैं। पहले डोज के बाद 28 दिन बाद दूसरा डोज दिया जाएगा।

गर्भवती महिलाओं को नहीं लगेगा टीका
गर्भवती होने पर महिला को टीका नहीं लगाया जाएगा। अगर आप फैमिली प्लानिंग कर रहे हैं, तो पुरुष को भी टीका नहीं लगेगा। पीपुल्स यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर राजेश कपूर ने बताया हम पूरी तरह तैयार हैं। यह भोपाल के लिए सौभाग्य की बात है। अब तक 10 से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। इनमें एक महिला भी शामिल है।

वैक्सीनेशन के बाद जांचेंगे असर
वैक्सीनेशन के बाद वॉलिंटियर्स की इम्युनिटी की जांच की जाएगी। इस जांच में टीकाकरण के बाद संबंधित व्यक्ति के इम्यून सिस्टम में हुए बदलाव का एनालिसिस किया जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक वॉलिंटियर्स का टीकाकरण के बाद एंटीबॉडी टेस्ट एक निश्चित समय अंतराल के बाद किया जाएगा, ताकि संबंधित में वैक्सीन के बाद एंटीबॉडी बनने के लेवल को जांचा जा सके।

गांधी मेडिकल कॉलेज में अगले हफ्ते से शुरू होगा ट्रायल

गांधी मेडिकल कॉलेज में अगले हफ्ते से ट्रायल शुरू होगा। अस्पताल प्रबंधन ने इसके लिए एक नई साइट तैयार की है, इसके दस्तावेज इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च को भेज दिए हैं। लेकिन कॉलेज डीन डॉ. अरुणा कुमार का कहना है कि संस्थान में covaxin के ट्रायल के लिए आईसीएमआर ने साइट पर असहमति जताई थी।

पीपुल्स यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर राजेश कपूर से पीपुल्स समाचार ने की थी  खास बातचीत 

पीपुल्स यूनिवर्सिटी, पीपुल्स मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल का यह सौभाग्य है कि हमें कोरोना वैक्सीन के फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल से जोड़ा गया है। यह अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है कि पूरे एमपी और छत्तीसगढ़ में अभी हम एक मात्र मेडिकल कॉलेज हैं जो कोरोना वैक्सीन ट्रायल से जुड़े हैं। 

इस वैक्सीन का नाम कोवैक्सीन है, जिसे इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के एक इंस्टीट्यूट- नेशनल इंस्टीट्यट ऑफ वायरोलॉजी पुणे द्वारा बनाया गया है। वैक्सीन की टेक्नोलॉजी उन्होंने डेवलप की है और फिर उसे भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड, हैदराबाद को ट्रांसफर किया है। इस वैक्सीन को तैयार करने और टेस्टिंग करने वाला भारत बायोटेक एक मेजर वैक्सीन मैन्यूफैक्चरर है। उनके पास वर्ल्ड क्लास बॉयोसेफ्टी लेवल-3 कंटेनमेंट फैसेलिटी हैं। 

भारत बायोटेक ने 2 फेज के ह्यूमन ट्रायल कर लिए हैं। दोनों ही फेज को भारत सरकार के ड्रग्स कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने अप्रूव किया है। अब फेज-3 ट्रायल है, यह बड़ी आबादी पर होता है। यह करीब 25,000 से 26,000 लोगों पर होगा। इसके लिए पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण सभी जगह के करीब 25 मेडिकल कॉलेजों को चुना गया है। फेज-3 ट्रायल अभी 10 कॉलेजों में शुरू हो गया है। पीपुल्स मेडिकल कॉलेज 11वां कॉलेज है जहां पर फेज-3 का ट्रायल किया जा रहा है। 

हम इस ट्रायल को मिशन की तरह ले रहे हैं, क्योंकि यह वैक्सीन न तो किसी शहर के लिए है, न किसी प्रदेश के लिए है और न ही किसी देश के लिए, यह विश्व भर के लिए है। 
हमारा लक्ष्य है 2,000 वॉलेंटियर्स पर यह ट्रायल करना। इस ट्रायल को रेंडमाइज डबल ब्लाइंड कंट्रोल ट्रायल कहते हैं। इसमें 50 प्रतिशत को वैक्सीन दिया जाएगा और 50 प्रतिशत को सैलाइन मिलेगा।