मप्र: ग्रामीण ऋण मुक्ति विधेयक को मंजूरी, गैरलाइसेंसी साहूकार से लिया कर्ज नहीं चुकाना पड़ेगा; वसूली करने वाले को जेल और जुर्माना होगा

 12 Jan 2021 05:10 PM

भोपाल। शिवराज कैबिनेट की बैठक में मंगलवार को किसानों को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने मप्र ग्रामीण ऋण विमुक्ति विधेयक 2020 को मंजूरी दे दी है। इसके तहत 15 अगस्त 2020 तक भूमिहीन कृषि श्रमिक, सीमांत और छोटे किसानों को गैर लाइसेंसी साहूकारों से लिया गया कर्ज और ब्याज के पैसे नहीं चुकाने पड़ेंगे। ना ही उनसे वसूली की जा सकेगी। यदि कोई गैर लाइसेंसी साहूकार इस विधेयक का उल्लंघन करता है, तो उसके लिए 3 साल की सजा और 1 लाख रुपए जुमार्ने का प्रावधान किया गया है। सिविल न्यायालय में गैर अधिनियम के दायरे में आने वाले केस की सुनवाई नहीं होगी। ऋण वसूली के लिए राजस्व प्रक्रिया के तहत चल रही कार्रवाई भी समाप्त हो जाएगी। विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद सरकार इसे विधानसभा में पारित कराएगी। इसके बाद लागू करेगी।

शिवराज कैबिनेट की बैठक में सभी मंत्रियों के साथ 6 महीने 10 दिन बाद मंत्रालय में बैठक हुई। इससे पहले मंत्रिमंडल विस्तार के बाद 2 जुलाई 2020 को मंत्रालय में बैठक हुई थी। इसके बाद से लगातार वर्चुअल बैठक हो रही थी। इसमें सभी मंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जुड़ते थे।

विधेयक लागू होने से तीन श्रेणी के किसानों को इसका लाभ मिलेगा। पहले में भूमिहीन कृषि श्रमिक होंगे। यानी जिनके पास जमीन नहीं है और वे अन्य किसी के खेत में मजदूरी करते हैं या बटाई पर खेती करते हैं। दूसरा सीमांत किसान होंगे। जिनके पास आधा हेक्टेयर सिंचित या 1 हेक्टेयर तक सिंचित जमीन है। तीसरा छोटे किसान, जिनके पास 1 हेक्टेयर तक सिंचित या 2 हेक्टेयर तक असिंचित जमीन है। इससे पहले अनुसूचित क्षेत्रों के अनुसूचित-जनजाति वर्ग के व्यक्तियों को गैस लाइसेंसी साहूकारों से मुक्ति दिलाने का कानून लागू किया जा चुका है।

इसके अलावा, कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री सूक्ष्म, खाद्य उद्यम उन्नयन योजना को लागू करने की मंजूरी दी गई। इस योजना के तहत राज्य सरकार को 500 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इसमें सहकारी समितियों के माध्यम से वेयर हाउस और कोल्ड स्टोरेज का निर्माण किया जाएगा।