मध्यप्रदेश के खरगोन का यह प्रसिद्ध मंदिर जहां मकर संक्रांति पर पड़ती है सूर्य की पहली किरण, पढ़ें इसके बारे में

 14 Jan 2021 02:21 PM

भोपाल। उत्तर भारत सहित देश भर में आज मकर संक्रांति का त्योहर धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस दिन तिल और स्नान का विशेष महत्व होता है। लोग शरीर पर तिल लगाकर स्नान करते हैं और तिल का सेवन भी करते हैं। 

सूर्य की पहली किरण पड़ती है
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में स्थिति प्राचीन नवग्रह मंदिर का मकर संक्रांति पर काफी महत्व है। मकर संक्रांति पर यहां सूर्य देव की प्रतिमा पर सूर्य की पहली किरण पड़ती है। देश का दूसरा ऐसा यह मंदिर है, जहां सूर्य की पहली किरण आती है। इस मंदिर में चारों ओर नवग्रहों की प्राचीन मूर्तियां स्थापित हैं। यहीं वजह है कि देश भर से श्रद्धालु यहां भगवान के दर्शन के लिए आते हैं। मकर संक्रांति पर सूर्य मंदिर में सूरज की पहली किरण मंदिर के गुंबद से होते हुए भगवान सूर्य की मूर्ति पर पड़ती है। 

सूर्य की आगवानी का पर्व है 
प्रसिद्ध नवग्रह मंदिर के पुजारी लोकेश जागीरदार ने बताया कि मकर संक्रांति, सूर्य की आगवानी का पर्व होता है। नवग्रह मंदिर सूर्य प्रधान है। यहां गर्भग्रह में सूर्य की मूर्ति बीच में विराजित है, मूर्ति के आसपास अन्य ग्रह हैं। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर सूर्य की पूजा की जाती है, तो नवग्रह की कृपा होती है, वर्षभर के लिए हमें ग्रहशांति का फल मिलता है। प्राचीन ज्योतिष के सिद्धांतों के अनुसार मंदिर की रचना की गई है।

खरगोन को नवग्रह नगरी भी करते हैं
नवग्रह मंदिर की वजह से खरगोन का नवग्रह नगरी भी कहा जाता है। इस मंदिर की स्थापना 600 साल पहले हुई है। इसकी स्थापना शेषप्पा सुखावधानी वैरागकर ने की थी। शेषप्पा मूल रूप से कर्नाटक के रहने वाले थे। वह अष्टम् महाविद्या बगलामुखी देवी के उपासक थे।

विशेष मंदिर की रचना
प्राचीन ज्योतिष के सिद्धांतों के अनुसार इस मंदिर की रचना की गई है। मंदिर में प्रवेश करते समय सात सीढ़ियां हैं, जो सात वार का प्रतीक है। इसके बाद ब्रह्मा विष्णु स्वरूप के रूप में मां सरस्वती, श्रीराम और पंचमुखी महादेव के दर्शन होते हैं। फिर गर्भगृह में जाने के लिए जहां 12 सीढ़ियां उतरनी होती है, जो 12 महीने की प्रतीक हैं। गर्भ गृह में नवग्रह का दर्शन होता है। इसके बाद दूसरे मार्ग पर फिर 12 सीढ़ियों से ऊपर चढ़ते हैं, जो 12 राशियों की प्रतीक हैं। इस प्रकार से सात वार, 12 महीने, 12 राशियां और नवग्रह इनके बीच में हमारा जीवन चलता है और उसी आधार पर मंदिर की रचना की गई है।