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पीएम मोदी ने अहमदाबाद, सूरत मेट्रो प्रोजेक्ट का किया शिलान्यास; बोले- देश के दो बड़े कारोबारी केंद्रों की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी

 18 Jan 2021 12:13 PM

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अहमदाबाद मेट्रो के फेज-2 और सूरत मेट्रो प्रोजेक्ट का भूमि पूजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन प्रोजेक्ट्स से देश के दो बड़े कारोबारी केंद्रों की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि आज सूरत आबादी के लिहाज से एक तरफ देश का आठवां बड़ा शहर है, लेकिन दुनिया का चौथा सबसे विकसित होता शहर भी है। दुनिया के हर 10 हीरों में से 9 सूरत में तराशे जाते हैं।इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अलावा राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी मौजूद रहे।

12 हजार करोड़ की लागत है सूरत मेट्रो प्रोजेक्ट की
सूरत मेट्रो रेल परियोजना में कुल 40.35 किलोमीटर लंबाई है।
मेट्रो प्रोजेक्ट में 2 कॉरिडोर होंगे, जिसकी अनुमानित लागत 12020 करोड़ रुपये है।
पहला कॉरिडोर सरथना से ड्रीम सिटी के बीच होगा, जिसकी लंबाई 21.61 किलोमीटर है।
15.14 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटिड और 6.47 किलोमीटर हिस्सा भूमिगत होगा।
दूसरा कॉरिडोर भेसन से सरोली के बीच बनेगा, जिसकी लंबाई 18.74 किलोमीटर है।

अहमदाबाद मेट्रो की लागत 5384 करोड़ रुपये
अहमदाबाद मेट्रो के दूसरे फेज में भी दो कॉरिडोर होंगे।
इस मेट्रो की कुल लंबाई 28.25 किलोमीटर होगी।
22.83 किलोमीटर लंबा पहला कॉरिडोर मोटेरा स्टेडियम से महात्मा मंदिर तक बनेगा।
5.41 किलोमीटर लंबा दूसरा कॉरिडोर जीएनएलयू से गिफ्ट सिटी तक बनेगा।
अहमदाबाद मेट्रो के दूसरे फेज में कुल 5384.17 करोड़ रुपए का खर्च आएगा।

 


पीएम के संबोधन की प्रमुख बातें
 प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सिंचाई के लिए भी आज गुजरात के उन क्षेत्रों तक पानी पहुंचा है, जहां कभी सिंचाई की सुविधा असंभव मानी जाती थी। सरदार सरोवर बांध हो, सोनी योजना हो, वॉटर ग्रिडस का नेटवर्क हो। गुजरात के सूखाग्रस्त क्षेत्रों को हरित करने के लिए व्यापक काम किया गया है।

उन्होंने कहा कि गुजरात के शहरों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी बीते वर्षों में अभूतपूर्व विकास हुआ है। विशेष रूप से गांव में सड़क, बिजली और पानी की स्थिति में बीते 2 दशकों में जो सुधार आया है। वो गुजरात की विकास यात्रा का बहुत अहम अध्याय है। पीएम मोदी ने कहा कि बीते 6 वर्षों में देश में स्वास्थ सेवाओं से जुड़ी योजनाएं शुरू हुई हैं, उनका भी लाभ गुजरात को बहुत व्यापक रूप से मिल रहा है। आयुष्मान भारत योजना के तहत गुजरात के 21 लाख लोगों को मुफ्त इलाज मिला है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज सूरत आबादी के लिहाज से एक तरफ देश का आठवां बड़ा शहर है, लेकिन दुनिया का चौथा सबसे विकसित होता शहर भी है। दुनिया के हर 10 हीरों में से 9 सूरत में तराशे जाते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले के 10-12 वर्ष में सिर्फ 225 किमी मेट्रो लाइन ऑपरेशनल हुई थी। वहीं बीते छह वर्षों में 450 किमी से ज्यादा मेट्रो नेटवर्क चालू हो चुका है।अहमदाबाद के बाद सूरत गुजरात का दूसरा बड़ा शहर है, जो मेट्रो जैसे आधुनिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम से जुड़ेगा। सूरत में मेट्रो नेटवर्क एक प्रकार से पूरे शहर के महत्वपूर्ण व्यापारी केंद्र को आपस में कनेक्ट करेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने अहमदाबाद और सूरत मेट्रो परियोजना का शिलान्यास करते हुए कहा कि उत्तरायण की शुरूआत में आज अहमदाबाद और सूरत को बहुत ही अहम उपहार मिल रहा है। रविवार को ही केवडिया के नए रेल मार्ग और नई ट्रेनों की शुरुआत हुई है। अहमदाबाद से भी आधुनिक जन शताब्दी एक्सप्रेस अब केवडिया तक जाएगी।  उन्होंने कहा कि आज अहमदाबाद में 17 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के इंफ्रास्ट्रक्चर का काम शुरू हो रहा है। ये दिखाता है कि कोरोना के इस काल में भी नए इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण को लेकर देश के प्रयास लगातार बढ़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने अहमदाबाद और सूरत मेट्रो परियोजना का शिलान्यास करते हुए कहा कि इन दोनों मेट्रो परियोजना के पूरा होने पर लाखों लोगों को इसका फायदा होगा। ये मेट्रो लाइन आने वाले वक्त की जरूरत के हिसाब के तैयार की जा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले की सरकारों के पास मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के लिए सही नीति नहीं है, हमारी सरकार देश में मेट्रो के विस्तार के लिए राष्ट्रव्यापी नीति तैयार की है। 

इस अवसर पर पीएम ने कहा कि उत्तरायण की शुरुआत में आज अहमदाबाद और सूरत को बहुत ही अहम उपहार मिल रहा है। रविवार को ही केवडिया के नए रेल मार्ग और नई ट्रेनों की शुरुआत हुई है। अहमदाबाद से भी आधुनिक जन शताब्दी एक्सप्रेस अब केवडिया तक जाएगी। उन्होंने कहा कि आज अहमदाबाद में 17 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के इंफ्रास्ट्रक्चर का काम शुरू हो रहा है। ये दिखाता है कि कोरोना के इस काल में भी नए इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण को लेकर देश के प्रयास लगातार बढ़ रहे हैं।