ड्राइवर लैस ट्रेन कैसे चलेगी, कौन इसे कंट्रोल करेगा और इसकी क्या-क्या खूबियां हैं, पढ़ें

 28 Dec 2020 04:43 PM

नई दिल्ली। सोमवार दोपहर एक बजे जैसे ही दिल्ली मेट्रो की ड्राइवर रहित ट्रेन ने शाहीन बाग से रफ्तार भरी तो भारत ने एक इतिहास रच दिया। भारत अब डेनमार्क, स्पेन, इटली, फ्रांस, जर्मनी, हंगरी, स्विट्जरलैंड और ब्रिटेन के साथ-साथ अमेरिका और कनाडा जैसे देशों की श्रेणी में आ गया है, जहां ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेनों का सफल संचालन किया जाता है। अमेरिका और यूरोपीय महाद्वीप के आधा दर्जन देशों के कई शहरों में दशकों से ड्राइवर लेस ट्रेनों का संचालन किया जाता रहा है। ब्राजील, पेरू और चाइल में तो काफी पहले से ही ड्राइवर लेस मेट्रो का संचालन किया जाता है। इससे न केवल खर्च बचता है, बल्कि तकनीकी खामियां भी कम आती हैं। 
तो आइए जानते हैं कि यह ट्रेन कैसे चलेगी, इसे कौन कंट्रोल करेगा और यदि दो मेट्रो ट्रेने आमने-सामने आ जाएंगी तो क्या होगा। 

ड्राइवर लेस मेट्रो ट्रेन की खूबियां
1. ट्रेन का चलना, रुकना, स्पीड पकड़ना, ब्रेक लगाना, दरवाजों का खुलना और बंद होना, साथ ही इमरजेंसी हालात को कंट्रोल करना सब कुछ आटोमैटिक होगा।

2. मेट्रो ट्रेन के सामने कैमरा लगा होगा। यह कैमरा ट्रेन के आगे की पूरी तस्वीर लाइव कंट्रोल रूम में दिखाएगा।

3. ट्रेन के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरे की लाइव स्ट्रीमिंग कंट्रोल रूम में होगी। इसी तरह कंट्रोल रूम से भी ट्रेन के भीतर लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग के जरिए संपर्क किया जा सकता है।

4. मेट्रो ट्रेन में चालक नहीं होने की सूरत में एलईडी स्क्रीन के जरिए लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग की जाएगी।

5. ओडीडी डिवाइस ट्रैक पर लगे होंगे, जो ट्रैक पर आने वाली किसी छोटी रुकावट को हटाकर ट्रेन को पटरी से उतरने यानी डीरेल होने से बचाएगा।


ड्राइवरलेस मेट्रो के सुरक्षा के क्या उपाया हैं

मेट्रो ट्रेन के दोनों तरफ हाई-एंड सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके जरिए मेट्रो ट्रेन के लाइव फुटेज को सीधे कंट्रोल रूम में देखा जा सकता है। इसके अलावा ट्रेन के अंदर लगे कैमरों की लाइव फुटेज भी सीधे कंट्रोल रूम में जाएगी। इंमरजेंसी के दौरान पैसेंजर कंट्रोल रूम के किसी व्यक्ति के साथ सीधे वीडियो चैट भी कर सकते हैं।

हर समय मेट्रो की रियल टाइम मॉनिटरिंग होगी। ट्रेन का संचालन पूरी तरह से सिग्नलिंग प्रणाली पर आधारित होगा। अगर कभी कोई सिग्नलिंग समस्या होती है, तो इसकी जानकारी सीधे कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी। इसके लिए, सिग्नलिंग सिस्टम के टॉवर पर सेंसर लगाए गए हैं। यदि ट्रैक पर कोई खराबी आती है, तो सूचना सीधे कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी। इसके अलावा, सेंसर यह भी सुनिश्चित करेंगे कि दो ट्रेनों के बीच कोई टक्कर न हो और वे एक निश्चित सुरक्षित दूरी बनाए रखें।

ड्राइवर लेस मेट्रो पूरी तरह से टैक्नोलॉजी के माध्यम से ऑपरेट की जाएगी। यात्रा के दौरान किसी भी यात्री को यदि मदद की जरूरत होगी तो एक स्टाफ सदस्य हमेशा मेट्रो में मौजूद रहेगा। दावा किया जा रहा है कि ड्राइवर लेस मेट्रो के परिचालन से ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी भी बढ़ेगी और यात्रियों को अधिक समय तक प्लेटफार्मों पर इंतजार नहीं करना पड़ेगा।