टूटा 23 साल का रिकॉर्ड, पारा @ 2.2

Broken 23-year record, mercury @ 2.2

टूटा 23 साल का रिकॉर्ड, पारा @ 2.2

ग्वालियर। उत्तराखंड के बर्फीली पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं व ग्वालियर-चंबल संभाग के ऊपर छाए घने कोहरे के कारण हाड़ कंपाने वाली सर्दी ने अब रौद्र रूप धारण कर लिया है, जिसके प्रभाव से सोमवार को ग्वालियर में न्यूनतम तापमान 2.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जिसने पिछले 23 साल का रिकार्ड तोड़ दिया है। सन् 1996 में 11 दिसंबर को ग्वालियर में न्यूनतम तापमान 2.2 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड हुआ था। जिससे लोगों घरों में कैद होने को मजबूर है। इसके साथ ही मुरैना व दतिया में 30 दिसंबर को 2.2 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रिकार्ड हुआ है। मौसम अनुसंधान केंद्र ग्वालियर के प्रभारी अधिकारी चंद्रकांत उपाध्याय के अनुसार राजस्थान पर एक ऊपरी हवा का चक्रवात बना है। जिससे चलते रविवार को दोपहर के समय हवा का रुख उत्तर से बदलकर कुछ देर के दक्षिण-पूर्वी हो गया था। इस सिस्टम के कारण वातावरण में नमी आने का सिलसिला शुरू हो गया है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से बुधवार से शुक्रवार को ग्वालियर-चंबल संभाग में बारिश होने की संभावना बन रही है। गरीबों को ठंड से बचाने जेयू के प्रो. खटीक बांट रहे गर्म कपड़े हाड़ कपाने वाली सर्दी का सितम जारी है। अमीर हो या गरीब ठंड से सभी प्रभावित हो रहे हैं। जिन लोगों के पास पैसे हैं, वह ठंड से बचने के बाजार से गर्म कपड़े खरीद रहे हैं मगर एक वर्ग ऐसा भी है जो ठंड से बचाव के लिए आग जलाकर शरीर को गर्म कर रहा है। जीवाजी विवि के प्रो. राजेंद्र खटीक बाजार से गर्म कपड़े खरीदकर गरीबों को बांट रहे हैं। प्रो. खटीक की मानें तो हम समाज का हिस्सा है और हमारा कर्त्तव्य बनता है कि जरूरतमंद लोगों की मदद करें। ठंड जोरों की पड़ रही है, इसलिए वह ऐसे लोगों को गर्म कपड़े दे रहे हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। प्रो. खटीक ने कपड़े अपनी कार में रख रहे हैं, उन्हें जहां भी बिना गर्म कपडेÞ के गरीब लोग दिखाई देते हैं, वह कपड़े निकालकर उन्हें थमा देते हैं।