वॉट्सएप पर पांच घंटे में शिकायतों का हल, कॉल सेंटर में महीनों की पेंडिंग

वॉट्सएप पर पांच घंटे में शिकायतों का हल, कॉल सेंटर में महीनों की पेंडिंग
वॉट्सएप पर पांच घंटे में शिकायतों का हल, कॉल सेंटर में महीनों की पेंडिंग

भोपाल  । अयोध्या नगर एच-सेक्टर में कई दिनों से स्ट्रीट लाइटें बंद थीं। रहवासी विमन सिंह यादव, सुरेश सैनी ने नगर निगम के कॉल सेंटर में शिकायत की, लेकिन स्ट्रीट लाइट नहीं सुधरी। दो दिन पहले यही शिकायत नगर निगम के वॉट्सएप हेल्प लाइन नंबर पर की तो दो घंटे में ही स्ट्रीट लाइट दुरुस्त हो गई। इसमें फर्क इसलिए है, क्योंकि कॉल सेंटर में शिकायतों के समाधान में अधिकारी सुस्ती बरतते हैं। सीएम हेल्प लाइन और स्वच्छ मैप का भी यही हाल है। जबकि, वॉट्सएप पर शिकायतों की मॉनिटरिंग खुद नगर निगम प्रशासक और संभागयुक्त कविंद्र कियावत कर रहे हैं। वे लोगों के फीडबैक पर भी नजर रख रहे हैं। ऐसे में निगम के अधिकारी तुरंत कार्रवाई कर रहे हैं। यहां 90 फीसदी शिकायतों का समाधान उसी दिन कर दिया जाता है। दरअसल नाला- नालियों सहित अन्य साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट, सीवेज लाइन चोक की दिक्कतों को दूर करने के लिए नगर निगम ने 4 जून को वॉट्स एप कंप्लेंट नंबर जारी किया है। इसमें दो से पांच घंटे में शिकायत समाधान का होता है। जलभराव और बाढ़ की निगम की तैयारियों की समीक्षा बैठक में कविंद्र कियावत ने नगर निगम आयुक्त को वॉट्स एप कंप्लेंट नंबर जारी करने को कहा था। तब वॉट्सएप कंप्लेंट नंबर 9713033344 जारी किया था। नालियां और नाले साफ नहीं हुए या फिर सफाई में खामी की शिकायत और सफाई से खुश हैं तो फीडबैक भी नगर निगम को इसी नंबर पर दे सकते हैं।

स्वच्छ मैप एप : बिना समाधान शिकायतें बंद 

स्वच्छ मैप एप मोबाइल एप्लीकेशन है। इसमें गंदगी का फोटो अपलोड करने पर एप लोकेशन ट्रेस कर संबंधित जोन के अधिकारियों को फॉरवर्ड कर देता है। वे निराकरण कर फोटो अपलोड करते हैं। आवेदक फीड बैक भी दे सकता है।

कहां हो रही गड़बड़ी

 एप में  ऑनलाइन सफाई शुरू हो गई है। यानी बताई जाने वाली लोकेशन पर सफाई के बजाए दूसरी साफ जगहों की फोटो अपलोड कर शिकायतें बंद की जा रही हैं। बदस्तूर ये सिलसिला चल रहा है। ऑनलाइन सफाई की पड़ताल में सैकड़ों तस्वीरें मिल जाएंगी। कई शिकायतें बंद कर दीं, लेकिन सफाई के बाद की फोटो अपलोड नहीं की। उसकी जगह लिखा कि फोटो नॉट एवेलेवल, यानी फोटो नहीं है।

 शिकायत की तारीख :18 जुलाई 19 समय : सुबह 11:22 बजे पता : नारियलखेड़ा 

01 मोहन गौर ने एप में फोटो अपलोड किया, जिसमें खाली मैदान कीचड़ से भरा हुआ है। उसमें एक कूड़ेदान रखा हुआ और चारों तरफ गंदगी फैली हुई है। इस कंप्लेंट को 20 जुलाई को सुबह 10:47 बजे क्लोज कर दिया गया। सफाई के बाद इस जगह की जो फोटो अपलोड की गई, वह एक पक्की सीसी सड़क की है।

शिकायत की तारीख : 21 जुलाई 19 समय : शाम 04:38 बजे पता : 250, रुसल्ली, करोंद भोपाल

02 शकील खान ने एप में कॉलोनी के मैदान की फोटो अपलोड की, जो बरसाती पानी से दलदल हो चुका था। साथ ही गंदगी पसरी थी। इस पर अमल कर निगम अमले ने 22 जुलाई को सुबह 9:34 बजे एप में फोटो अपलोड किया, जो सीसी रोड के बगल की नाली का है। जो नाली दिख रही है, उसकी भी सफाई नहीं हुई है।

 निगम कॉल सेंटर : 40 फीसदी शिकायतों का ही निराकरण

 नगर निगम काल सेंटर के हेल्प लाइन नंबर 155304 और 18002330014 पर रोजाना औसत 200 शिकायतें दर्ज होती हैं। जबकि, इनमें से 40 फीसदी शिकायतों का ही निराकरण 24 घंटों के दौरान हो पाता है।

 क्यों होती है देरी 

शिकायत दर्ज होते ही सॉμटवेयर के जरिए संबंधित विभाग और अधिकारी को एसएमएस के जरिए शिकायत भेजी जाती है। साथ ही कॉल सेंटर से संबंधित अधिकारी को फोन पर शिकायत नोट भी कराई जाती है। इसके बाद अधिकारी को शिकायत हल करानी होती है, जो लापरवाही बरतते हैं। हालांकि, कॉल सेंटर से शिकायकर्ता से फीडबैक लिया जाता है।

सीएम हेल्प लाइन

 हर दिन आती हैं करीब 150 शिकायतें, 50 होती हैं पेंडिंग 

सीएम हेल्प लाइन से निगम को औसत हर दिन 150 शिकायतें मिलती हैं। इनमें 70% सफाई और 30% शिकायतों में सीवेज, अतिक्रमण, अवैध निर्माण, पानी सप्लाई और स्ट्रीट लाइट संबंधी होती हैं। इनमें से औसत हर दिन 100 शिकायतों का ही निदान हो पाता है। इस लिहाज से एक महीने में पेंडिंग का आंकड़ा 1500 के पहुंचता है। नगर निगम के मुताबिक यह आंकड़ा 1085 के करीब है।

 फॉरवर्ड के चलते हो रही देरी 

1 सीएम हेल्प लाइन में शिकायत की गई।

2 यहां से शिकायत नगर निगम फॉरवर्ड।

3 सीएम हेल्प लाइन सेल से शाखा को।

4 विभाग प्रमुख ने शिकायत जिम्मेदार अफसर को फॉरवर्ड की।

5 वहां से कर्मचारियों को फॉरवर्ड की।

6 वे निराकरण कर शिकायतकर्ता से फीडबैक ले शिकायत बंद करवाते हैं।

नोट: 40 फीसिदी शिकायतें बिना निराकरण और बिना फीडबैक लिए बंद कर दी जाती हैं। निराकरण में भी 15 से 20 दिन लग जाते हैं।

 निगम प्रशासक से नहीं हो सका संपर्क 

संभागायुक्त एवं नगर निगम प्रशासक कविंद्र कियावत से इस संबंध में उनकी राय जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर 9425600332 पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।