विक्टोरिया में लाखों की मशीन खा रही धूल नहीं हो पा रही कम्पोनेंट यूनिट तैयार

विक्टोरिया में लाखों की मशीन खा रही धूल नहीं हो पा रही कम्पोनेंट यूनिट तैयार

जबलपुर । जिला अस्पताल विक्टोरिया के ब्लड बैंक में कम्पोनेंट सेपरेशन मशीन विगत 3 माह से रखे-रखे धूल खा रही है। लेकिन इसे लगाने में अभी तक विभाग ने रुचि नहीं दिखाई है। लिहाजा ऐसे में बारिश के सीजन में मच्छरजनित जानलेवा बीमारी डेंगू के अटैक से निपटने के लिए स्वास्थ्य महकमे के पास तकनीक अड़चनें सामने आ रहीं हैं। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक, पैथोलॉजी में डेंगू पीड़ितों के लिए सबसे जरूरी कम्पोनेंट प्लेटलेट निकालने के लिए काम आने वाली मशीन कम्पोनेंट सेपरेशन को शुरू होने में करीब 15-20 दिन और लग सकते है। इस बीच मरीजों को एल्गिन व मेडिकल के भरोसे काम चलाना पड़ेगा। वो तो अच्छा है कि बारिश में विलंब हो रहा है। यदि बारिश समय पर आ जाती, और मच्छर जनित ये रोग फैल जाता, तो लेने के देने पड़ जाते। सीएमएचओ ने बताया कि जिला अस्पताल में कम्पोनेंट सेपरेशन के लिए जो मशीन जिला प्रशासन ने दी है वह अत्याधुनिक तकनीकों से लैस है, लेकिन उसके काम करने के लिए पार्टस अभी नहीं मिल पाए हैं। साथ ही इसके लिए लायसेंस भी जरूरी होता है,जिसे लेने के लिए प्रक्रिया चल रही है। हम इस प्रयास में लगे हुए हैं कि मरीज सामने आने से पहले इसे शुरू कर दिया जाए। इसके लिए संबंधित कम्पनी के अधिकारियों से जल्द से जल्द पार्टस भेजकर इस्टॉल करने के लिए कहा है ताकि समय रहते यह शुरू हो ओर मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

एक नजर में जानिए क्या है कम्पोनेंट यूनिट

प्राप्त जानकारी के अनुसार ब्लड में 4 कंपोनेंट हेते है,इनमें रेड ब्ल्ड सेल,आरबीसी,प्लाज्मा,प्लेटलेट्स और क्रायो प्रेसीपिटेट शामिल हैं। सेपरेशन यूनिट में ब्लड को घुमाया जाता है। इससे ब्लड परत दर परत, लेयर बाई लेयर हो जाता है और आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट अलग-अलग हो जाते हैं। जरुरत के मुताबिक इनकों निकाल लिया जाता है। निकाले गए रक्त के प्रत्येक तत्व की अलग-अलग जीवन अवधि होती है। एक यूनिट 3 से 4 लोगों की जरुरत पूरी कर सकती है।

जिला प्रशासन से की गई थी मांग

कलेक्टर भरत यादव की पहल व उनके अथक प्रयासों के चलते और शहर की सामाजिक संस्थाओं की मांग व जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों के उपचार के दौरान लगने वाले कंपानेंट पैक सेल को देखते हुए कंपोनेंट यूनिट की स्थापना का निर्णय लिया गया था। जिसके फलस्वरुप मशीन व यूनिट के लिए पर्याप्त जगह होंने के बावजूद इसका संचालन नहीं हो पा रहा है और सभी के प्रयासों पर पानी फेरने का काम किया जा रहा है।