फिर टला घमापुर-रांझी स्मार्ट रोड का निर्माण कार्य जगह-जगह भर रहा बारिश का पानी

 04 Jul 2020 07:45 AM  7

जबलपुर । घमापुर से रांझी तक बनने वाली 8 किमी लंबी स्मार्ट रोड पर लगा ग्रहण उतरने का नाम नहीं ले रहा है। करीब 12 साल से यहां के रहवासी इस रोड की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कभी विभागीय उदासीनता तो कभी राजनीतिक कारणों से इसका निर्माण टलता गया। फाइनली जब नगर निगम ने स्मार्ट सिटी के माध्यम से 24 करोड़ रुपए की लागत से इसका निर्माण चालू करवाया तो धीमी चाल के चलते दो साल में भी इसका काम अभी अधूरा है। आलम यह है कि नाली बनने के बाद भी पानी सड़क पर जमा रहता है। पोल शिटंग अभी तक नहीं किए गए हैं। घमापुर से सतपुला के बीच के अतिक्रमण नहीं हट पाए हैं। वहीं गोकलपुर से रांझी के बीच भी अभी तक कई कब्जे सिर ताने खड़े हैं। यही कब्जे शुरूआत से ही इस मार्ग के मुख्य अवरोधक बने हुए हैं। तगड़ी राजनीतिक छत्रछाया के चलते इनका नगर निगम बाल भी बांका नहीं कर पा रही है। अब बारिश के चार महीने तक इस रोड का काम बंद रहेगा जिसके चलते इसके कंपलीट होने में यह साल भी गया मानिए।

सुधार कार्य के बिना डिवाइडरों में हुई पुट्टी

निर्माण के दौरान कलेक्टर भरत यादव ने डिवाइडर निर्माण के तरीके पर आपत्ति जताई थी। इनमें सुधार कीजगह और तेजी से मनमाने ढंग से डिवाइडर बनवा लिए गए और इन पर पुट्टी भी करवा दी गई। इसका निर्माण कायदे से मेंटेनेंस फ्री होना चाहिए ताकि बार बार इस पर पेंट और पुट्टी की जरूरत न पड़े।

सड़क पर भर रहा पानी

घमापुर से आगे दो बैंकों के सामने रोड के दोनों ओर नाली तो बन चुकी है मगर सड़क पर भरने वाला पानी परेशानी पैदा कर रहा है। इस तरह की स्थिति कई जगह देखने मिली। पानी नि कासी के लिए नालियां तो बनाई गई हैं मगर जब तक रोड नहीं बनती तब तक पानी के भराव की समस्रूा स्थानीय लोगों को सहना ही होगी।

3 बार बदल चुकी डिजाइन

इस रोड को बनाने की घोषणा जब पहली बार हुई तो इसकी लागत करीब 35 करोड़ थी इसमें आवाजाही के लिए फोरलेन रोड 80 फीट में रखने के अलावा दोनों ओर सर्विस रोड बीच में रेलिंग, स्ट्रीट लाइट,जेब्रा क्रासिंग, वाई-फाई फ्री स्मार्ट पोल इत्यादि लगाए जाने थे। इसके बाद यह प्रस्ताव खारिज हुआ तो दूसरी बार 30 करोड़ रुपए का प्रस्ताव बना,इसके बाद स्मार्ट सिटी ने 24 करोड़ रुपए से इसका नि र्माण का बीड़ा उठाया है।

फैक्ट फाइल

24 करोड़ है निर्माण लागत

8 किमी लंबी है रोड

2018 से जारी है निर्माण प्रक्रिया

300 के करीब हटने थे अतिक्रमण