रोक के बाद भी जारी है रेत खनन, बड़गौर से जा रहे दो डंपर पकड़े

रोक के बाद भी जारी है रेत खनन, बड़गौर से जा रहे दो डंपर पकड़े

ग्वालियर। भितरवार क्षेत्र में सिंध नदी पर संचालित हो रही लोहारी, बड़गौर रेत खदान पर रोक के बाद भी निरंतर पनडुब्बी से रेत निकाली जा रही है। इस क्षेत्र में बारिश की कमी होने से खनन माफिया की चांदी बनी हुई है। एक पखवाड़ा पहले रस्मअदायगी के बाद प्रशासन फिर आंख मूंदकर बैठ गया है। इस बीच शनिवार की देर रात पुलिस ने बड़गौर खदान से रेत लेकर आ रहे दो डंपर जब्त कर लिए हैं। भितरवार एसडीओपी दिलीप जोशी ने इन दो डंपरों को पकड़ने की कार्रवाई की है, लेकिन लोहारी घाट, बड़गौर, डबरा के घाटों पर जाने की इन्होंने भी जेहमत नहीं उठाई। पुलिस अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि यह काम मुख्यत: खनिज का है और खनिज वाले पुलिस बल की अनुउपलब्धता का बहाना बना लेते हैं। सच्चाई यह है कि पूरे कु एं में ही भांग घुली है। इसीलिए सब इस और से आंख मूंदकर बैठे हैं। शनिवार देर रात दो डंपर पकड़े जाने से यह तो पता चल ही गया कि खनिज माफिया किसी से कम नहीं है।

7 पनडुब्बी चल रही हैं

लोहारी घाट पर ही रोज ही छह से सात पनडुब्बियां नदी के भीतर से रेत बाहर उलीचने का काम कर रही हैं। सांझ ढ़ले ही पनडुब्बियां अपना काम शुरू कर दी है और अलसुबह तक रेत निकालने का काम जारी रहता है। इस बीच डंपरट्रक और ट्रैक्टरों से रेत की ढुलाई का काम जारी बना रहता है। हर रोज करीब 40 ट्रक-डंपर अकेले लोहारी घाट से रेत लेकर निकल रहे हैं। रेत से भरे ट्रक और डंपर की ग्वालियर शहर में कीमत 25 हजार रुपए की है। यानि हर दिन करीब दस लाख रुपए का रेत भितरवार से ग्वालियर भेजा जा रहा है।

डंपर बदल रहे हैं रास्ता

लोहारी घाट से रेत लेकर वाहन सीधे-सीधे भितरवार आने की बजाय करियावटी तिराहा,भानगढ़, देवरा, छीमक, चीनौर रोड से ग्वालियर आ रहे हैं। इन भारी वाहनों के के दबाव से सड़क उखड़ रही है सो अलग। तेज गति से दौड़ रहे ट्रक और डंपरों के कारण इन गांवों में पैदल चलने वालों को जान का खतरा बना रहता है।

राजनीतिक इच्छाशक्ति का है अभाव

भितरवार, डबरा क्षेत्र में गैरकानूनी ढ़ंग से हो रहे रेत खनन रोकने में प्रशासन इसलिए भी नाकाम है क्योंकि भितरवार और डबरा दोनों जगह कांग्रेस के विधायक जीतकर पहु्ुंचे है ंऔर संयोग से दोनों मंत्री भी हैं। अगर यह लोग प्रशासन पर दबाव बनाते तो जरूर अवैध खनन बंद हो जाता। खनन माफिया के लिए यह स्थिति इसलिए भी मुफीद है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में भाजपा नेतृत्व चुप्पी साधे हुए है। भितरवार में अनूप मिश्रा जैसे दिग्गज नेता की हार से भाजपा के वहां पैर उखड़े हुए हैं।