कोरोना कर्मवीर: जंग जीतने के लिए सबकुछ अर्पण, समर्पण किया इन्होंने

Corona Karmaveer: He surrendered, surrendered everything to win the battle

कोरोना कर्मवीर: जंग जीतने के लिए सबकुछ अर्पण, समर्पण किया इन्होंने

ग्वालियर। कोरोना वायरस ने ग्वालियर के साथ प्रदेश और देश को व्यथित कर दिया है। यह व्यथा ग्वालियर के साथ इसलिए बढ़ गई क्योंकि इसे रेड जोन में पहुंचा दिया गया है। इसके बाद भी ग्वालियर के कर्मवीर पीछे नहीं हटे बल्कि समाज को स्वस्थ्य बनाए रखने के लिए पुलिस, डॉक्टर दोनों संयमित ढ़ंग से समाज की सेवा में जुटे हैं। इस तरह का अद्भुत संयोग पहले कभी नहीं देखा गया। मरीज भी डॉक्टर को देवतुल्य मान रहे हैं। क्योंकि डॉक्टर और पुलिस ने इस कार्य में स्वयं को हम कर दिया है। इंदौर और भोपाल के उदाहरणों से समझा जा सकता है। लॉक डाउन का एक माह बीतने पर भी अपने कतर्व्य पथ से पीछे नहीं हटे।

पाइंंटों पर चौकसी और चौकस निगाहें
उप पुलिस अधीक्षक सीवीएस रघुंवशी वैसे तो अनुसूचित जाति कल्याण के लिए बने अजाक का काम करते हैं। साथ ही हर जगह कोरोना को लेकर बनाए गए पाइंट पर चौकसी के साथ शहरभर में अपने सूत्रों के जरिए चौकस निगाह भी उनके   लिए कारगर हो रहे हैं। सामान्यत: हर रोज 12 से 14 घंटे की नौकरी करना पड़ रही है। सिर्फ कोरोना के कहर से शहर को बचाने के लिए । अधिकारियों के इशारे पर वे हर जगह मुस्तैद हैं। रघुवंशी कहते हैं कि स्वयं को सैनेटाइज करते हुए परिवार को भी सैनेटाइज करना पड़ रहा है। कभी क्वांरेटाइन सेंटर पर ड्यूटी तो कभी आईसोलेशन वार्ड पर भी निरंतर निगाह रखना पड़ रही है। रात्रि में जब भी घर जाना होता है तो पहले पदवेश घर के बाहर उतारना होता है फिर गर्म पानी से नहाने के बाद ही घर के अंदर प्रवेश करते हैं। वे कहते हैं चूंकि सभी लोग सैनेटाइज, मास्क सभी बात का ध्यान रखते हैं इसलिए परिवार से उतनी ही दूरी है जितनी जरूरी समझते हैं।

समाज के साथ परिवार का भी ख्याल
श्योपुर के सिविल सर्जन आरबी गोयल जिले में आने वाले कोरोना पॉजिटिव मरीजों को आईसोलेट कराने और क्वांरेटाइन करने में सुबह से लेकर रात्रि तक चिकित्सीय सेवा के साथ परिवार के कार्यों में भी हाथ बटा रहे हैं।  गोयल ने शुक्रवार को घर पर अपने बेटे के लिए नाई बनना नहीं भूले। उसकी कटिंंग भी की। गोयल कहते हैं कि हर दिन 12 से 14 घंटे वे कोरोना से ही जंग लड़ रहे हैं। हमारे जिले में 5 पॉजिटिव केस हैं। इसके बाद भी वे समाज, स्वास्थ्य और परिवार के कार्यों में हाथ बटा रहे हैं। गोयल कहते हैं कि कोरोना की जंग जीतकर ही हम समझेंगे हमने एक बड़ी जीत प्राप्त कर ली।

ग्रामीणों के लिए सहारा बना रामकृष्ण हॉस्पिटल
 महामारी के इस वैश्विक संकट की घड़ी में चिकित्सक महा योद्धा के रूप में अपना राष्ट्र धर्म निभा रहे हैं। इसी क्रम में ग्वालियर से लगभग 15 किलोमीटर दूर साडा क्षेत्र  में रामकृष्ण हॉस्पिटल को क्वॉरेंटाइन सेंटर  बनाया गया है । इस क्वॉरेंटाइन सेंटर के नोडल अधिकारी डॉ  रामकृष्ण धमानिया कोरोना के वायरस से संक्रमित होने की संभावना वाले मरीजों के लिए महा योद्धा बनकर डटे हुए हैं । जो भी लोग संक्रमण के लक्षण वाले पाए जाते हैं, उन्हें इसी सेंटर पर क्वॉरेंटाइन किया जाता है।