इफैक्ट: उद्यमियों का निकला दम 75 फीसदी फैक्ट्रियां चालू हो पाईं

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इफैक्ट: उद्यमियों का निकला दम 75 फीसदी फैक्ट्रियां चालू हो पाईं

ग्वालियर।  कोरोना के लॉक डाउन में इंसान ही घरों में कैद नहीं हुआ बल्कि मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र की 400 फैक्ट्रियों में करीब 25 फीसदी फैक्ट्रियां बेदम हो गईं हैं। एक पखवाड़ा पहले 50 फीसदी वर्कर के साथ शुरू हुईं फैक्ट्रियों को पटरी पर आने में अभी 30 से 40 दिन और लगेंगे। क्योंकि इन फैक्ट्रियों को अपने वर्कर को ढूंढ निकालने में परेशानी हो रही है। 50 फीसदी वर्कर के साथ कैडबरी, जमुना आॅटो और सूर्या रोशनी जैसी बड़ी फैक्ट्रियां तो चालू हो गईं लेकिन लघु और मध्यम दर्जे की फैक्ट्रियों के सामने उनकी लेबर परेशानी का सबब हो गई है। लॉक डाउन से पहले 10 से 12 हजार लोग काम करते थे लेकिन अब कम लोग ही दिख रहे हैं। एक मोटे आकलन में मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र से प्रति माह एक हजार करोड़ का नुकसान सीधे-सीधे सरकार, उद्यमियों को हुआ है। इसके अलावा बिजली कंपनी ने मालनपुर की हजारा इंडस्ट्री से 18 हजार वसूलने के बाद कनेक्शन जोड़ा । बिलौआ के व्यापारी को पहले एनओसी दी अब 50 लाख का बिल थमा दिया। 60 दिन लंबे लॉक डाउन के बाद मालनपुर की बंद पड़ी फैक्ट्रियों को चालू करने में उद्यमियों को पसीना आ गया। पहली फुर्सत में सभी फैक्ट्री संचालकों को 33 फीसदी फिर 50 फीसदी लेबर की जरूरत पड़ने लगी। यहां के कई फैक्ट्री संचालकों को अपनी गाड़ियां भेजकर घर चली गई लेबर को बुलाना पड़ा। एक सप्ताह बाद अब जरूर बड़ी फैक्ट्रियां चालू हो गईं और मध्यम दर्जे की फैक्ट्रियां भी चालू होने की दिशा में आगे बढ़ गईं हैं। लेकिन छोटी फैक्ट्रियां जो लेबर के भरोसे ही चल रही हैं उन्हें अपनी लेबर नहीं मिल पाई है। लॉक डाउन में नुकसान का आकलन मोटे पर लगाया जा रहा है। जीएसटी विभाग भी इस बारे में खुलासा नहीं कर पाया है।

बिजली बनी सबसे बड़ी समस्या

लॉक डाउन के दौरान जिन फैक्ट्रियों में एक भी यूनिट नहीं जली उनके ऊपर भी फिक्स्ड चार्ज दस हजार से लेकर एक लाख तक लगाया है। चेंबर आॅफ कॉमर्स ने इस फिक्स्ड चार्ज को समाप्त करने की मांग की है। चेंबर के मानसेवी सचिव प्रवीण अग्रवाल कहते हैं कि यह डिमांड हमारी नहीं बल्कि सभी उद्यमियों की और से की जा रही है। अगर फिक्स्ड चार्ज अप्रेल और मई माह का समाप्त कर दिया तो फैक्ट्री संचालकों के साथ बड़ी मदद होगी।

20 से 30 फीसदी लेबर लौटकर नहीं आएगी

मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र के बारे में कहा जा रहा है कि वहां 10 से 12 हजार मजदूर काम करते थे लेकिन लॉक डाउन में फैक्ट्रियां चालू होने के बाद भी 30 से 40 फीसदी मजदूर वापस लौटकर नहीं आए हैं। पैकेजिंग इंडस्ट्री के संचालक जितेन्द्र नागवानी कहते हैं कि जो लेबर चली गई थी वह लौटकर नहीं आई है। अभी हम लोकल मजदूरों से अपना काम चला रहे हैं। सरकार ने 50 फीसदी लेबर के साथ काम करने के लिए कहा है तो आप मान लीजिए कि 50 फीसदी का इंतजाम तो कर लिया लेकिन शेष का क्या होगा ? बताने वाला कोई नहीं है।

बड़ी फैक्ट्रियों को आॅर्डर छोटी परेशान

सबसे बड़ा संकट यह है कि बड़ी फैक्ट्रियों को आॅर्डर मिल भी रहे हैं और उनके पास क्षमता भी है। लेकिन लघु और मध्यम दर्जे की फैक्ट्रियों का आॅर्डर दिल्ली, गाजियाबाद, अहमदाबाद जाता था तो रेड जोन के चलते न आॅर्डर मिल रहे हैं और न ही कच्चा माल आ रहा है। आॅटो मंोबाइल की फैक्ट्रियों को जरूर मंडी गोविंदगढ़, चैन्नई से कच्चा माल आता था वह आना शुरू हो गया है। माल गाड़ियां अपनी रुटीन के हिसाब से मालनपुर स्टेशन पर लग रहीं है। कोरोना फैक्ट्रियों के लिए भी दंश लेकर आया है। भले ही सरकार ने 50 फीसदी कर्मचारियों के साथ फैक्ट्रियों को चालू करने की बात कही है लेकिन सबकुछ पटरी पर आने में दो माह और लगेंगे। क्योंकि हमारी जो प्रशिक्षित लेबर थी वह तो घर चली गई। बिजली का फिक्स्ड चार्ज हटाना था लेकिन बिजली कंपनी वह वसूल रही है। उद्यमियों के ऊपर यह बड़ी मार है।

400 में  से 300 फैक्ट्रियां चालू
मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र में करीब 400 फैक्ट्रियां हैं और इनमें 280 से लेकर 300 फैक्ट्रियां चालू हो गईं हैं। इनमें फूड प्रॉडक्ट की केडबरी, ब्रिटानियां, नोवा घी, की चालू हुर्ईंं तो जमुना आॅटो, सूर्या रोशनी भी चालू हो गईं हैं। इसके अलावा इलैक्ट्रोनिक आयटम, आयुर्वेदिक दवाईयां वाली फैक्ट्रियां भी चल निकली हैं। 27 मई की स्थिति तक 20 से 25 फीसदी फैक्ट्रियों के चालू होने का और इंतजार है। मालनपुर औद्योगिक संघ के चेयरमैन यादवेन्द्र सिंह कहते हैं जल्द ही सबकुछ पटरी पर आ जाएगा।