आस्था अनलॉक ना मंदिरों में बजे घंटे ना मस्जिदों गुरुद्वारा व चर्च में दिखीभीड़

 10 Jun 2020 08:02 AM  2

जबलपुर । अंतत: ढाई माह के बाद आस्था अनलॉक हुई। शहर व अंचल के सभी धर्म स्थल खुल गए। धर्म स्थलों में थर्मल स्केनिंग से लेकर सेनेटाइजेशन आदि सुरक्षा की सारी व्यवस्थाएं देखी गईं जिनका श्रद्धालुओं ने ज्यादातर जगह पालन भी किया। हालाकि पहले दिन श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड गिरावट नजर आई। इसके बाद भी लोगों को इस बात की खुशी रही कि धर्म स्थल खुल गए हैं। रानीताल गेट नंबर 2 के सामने स्थित हनुमान मंदिर में सामान्यतय भीड़ रहती है। खास तौर पर मंगलवार व शनिवार को हनुमान जी का विशेष दिवस होता है इसलिए यहां पर पैर रखने जगह नहीं मिलती। मंगलवार को यहां का नजारा अलग दिखा। यहां मंगलवार व शनिवार को कम से कम 5 हजार श्रद्धालु पहुंचते हैं मगर 2 सौ से 3 सा श्रद्धालु ही पहुंचे। श्रद्धालु तो पहुंचे मगर प्रबंधन ने ताला नहीं खोला। मंदिर प्रबंधन का कहना है कि जब तक कोरोना संकट से पूरी तरह से निजात नहीं मिलती ताला नहीं खोला जाएगा। हनुमान जी की पूजन अर्चन विधिवत अंदर ही होगी मगर दर्शन लोगों को बाहर से ही करने होंगे। तेवर स्थित त्रिपुर सुंदरी मंदिर में दर्शन के लिए करीब आधा सैकड़ा लोग पहुंचे जबकि सामान्य दिनों में यहां पर करीब 3 से 5 सौ लोग पहुंचते थे। थर्मल स्केनिंग व सेनिटाइजेशन के बाद ही मंदिर में प्रवेश मिला। यहां पर भी दर्शनार्थियों की संख्या बेहद कम रही। यहां आने वाले श्रद्धालुओं का कहना रहा कि हमें इस बात की खुशी है कि अब भगवती के दर्शन नित्य होंगे। सिविक सेंटर स्थित बगलामुखी मंदिर में सामान्य दिनों में 1 हजार श्रद्धालु आते हैं मगर मंगलवार को 2 सौ सेढाई सौ श्रद्धालु ही पहुंचे।जगदगुरू शंकराचार्य ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के नजी सचिव ब्रम्हचारी सुबुद्धानंद का आगमन हुआ। मंदिर में आने वाले सभी श्रद्धालुओं का गाइड लाइन अनुसार थर्मल स्केन व सेनिटाइजेशन किया गया। यहां पर भी संख्या अपेक्षाकृत कम रही।

मस्जिदों में गाइड लाइन का पालन

ओमती मस्जिद में पहुंचकर देखा गया तो यहां गेट पर ही थर्मल स्केनिंग व सेनिटाइज करने के बाद ही अंदर प्रवेश दिया जा रहा था। यहां पर भी सामान्य दिनों में 2 से 3 सौ लोग आते थे मगर मंगलवार को 8 से 10 लोग ही पहुंचे। जिन्होंने सोशल डिस्टैंसिंग के नियम और मास्क लगाकर पालन करते हुए खुदा की इबादत की।शहर की अन्य मस्जिदों व मजारों पर भी इसी तरह का नजारा देखने मिला।

मस्जिदों में गाइड लाइन का पालन ओमती मस्जिद में हर आनेवाले की थर्मल स्केनिंग करवाई गई। सेनिटाइजेशन के बाद सोशल डिस्टैंसिंग से खुदा की इबादत करने की व्यवस्था रही। हाफिज मोहम्मद अशफाक, इमाम,ओमती मस्जिद।

नहीं खुले चर्च, बाहर से ही हुई आराधना

शहर में अभी चर्च नहीं खुल ेहैं। बताया जाता है कि चर्च के संबंध में गत दिवस हुई धर्माचार्यों की बैठक में निर्णय न होने से अभी चर्च को नहीं खोला जा रहा है। वहीं विभिन्न चर्च में पहुंचकर ईसाई धर्म के अनुयाइयों ने चर्च के बाहर से ही मोमबत्ती जलाकर आराधना की।

गुरुद्वारों मेंभी कम पहुंचे श्रद्धालु

शहर के गुरूद्वारों में भी मंगलवार को कम श्रद्धालुओं की उपस्थिति देखी गई। मढ़ाताल गुरूद्वारे में प्रतिदिन करीब 500 सिक्ख धर्म के श्रद्धालुओं की आवाजाही होती है मगर मंगलवार को यह संख्या बामुश्किल डेढ़ दो दर्जन ही रही। सभी की गाइड लाइन का पालन करते हुए थर्मल स्केनिंग,सेनेटाइजेशन हुआ।

पहले दिन गुरूद्वारे में सभी व्यवस्थाएं गाइड लाइन के अनुसार की गईं । जो भी श्रद्धालु आए उनकी स्केनिंग के साथ सेनेटाइज कर ही प्रवेश दिया गया। हालाकि संख्या बहुत कम रही। महेन्दर सिंह नागी, व्यवस्थापक,मढ़ाताल गुरूद्वारा।

हमने निर्णय लिया है कि जब तक कोरोना संकट से पूरी तरह से छुटकारा नहीं मिलता हम हनुमान मंदिर के पट नहीं खोलेंगे। श्रद्धालुओं को बाहर से ही दर्शन मिलेंगे। हालाकि पूजन अर्चन पूरे विधि-विधान से चलेगा। आचार्य धर्मेन्द्र दुबे,पुजारी, हनुमान मंदिर, रानीताल