एमआरटीबी अस्पताल से परिजन बिना बताए ले गए दो मरीज

एमआरटीबी अस्पताल से परिजन बिना बताए ले गए दो मरीज

 
कोरोना संक्रमण के बाद निजी कंपनी के गार्डों ने ड्यूटी से की तौबा, सुरक्षा के लिए अभी तक नहीं मिला पुलिस बल

बड़े अस्पताल के टीबी चेस्ट सेंटर से शनिवार रात दो मरीजों को परिवार वाले बिना बताए ले गए। अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एडीएम बीबीएस तोमर ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखकर बड़े अस्पताल में सुरक्षा के लिए पुलिस बल मांगा था। एमजीएम मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने 1 करोड़ रुपए सालाना के हिसाब से यूडीएस कंपनी को ठेका दिया था, जिसमें गार्ड भी इसी कंपनी के थे, पर जैसे ही कोरोना संक्रमण फैला, यूडीएस कंपनी के आधे से ज्यादा गार्ड भाग गए। अभी तक पुलिस सुरक्षा नहीं मिल पाई है। कल यहां से दो मरीज भाग गए। 29 वर्षीय युवती नि. जवाहर नगर थाना राजेंद्र नगर को टीबी चेस्ट सेंटर में 2 मार्च को भर्ती किया था और परिजन कल मरीज को लेकर भाग गए। इसी तरह 55 वर्षीय एक बुजुर्ग नि. सिलावटपुरा को 31 मार्च को टीबी चेस्ट सेंटर में भर्ती किया था। कल रात नौ बजे परिजन उन्हें लेकर चले गए। खबर है कि एम्स से भी एक मरीज गायब हो गया। ये शहर के लिए बड़ा खतरा है, क्योंकि तीनों मरीज कोरोना संक्रमित थे और परिजन इन्हें बगैर उपचार और बगैर बताए ले गए हैं। ये जहां रहते हैं, वहां संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। तीनों मरीजों की तलाश के लिए पुलिस को सूचना दी गई है।
अरबिंदो अस्पताल से भी भागी युवती नहीं मिल रही
अरबिंदो अस्पताल से दो दिन पहले भागी कोरोना पॉजिटिव युवती का प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन पता नहीं लगा पा रहा है। युवती के भागने में अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां से जब युवती भागी थी, तब न तो सुरक्षाकर्मी मौजूद थे और न ही आइसोलेशन के बाहर बेरीकेड्स लगाए गए थे। आइसोलेशन वार्ड के सामने का एरिया भी पूरी तरह खुला था। दो दिन पहले तक यहां से आने व जाने वालों पर भी कोई रोक नहीं थी। इसका फायदा उठाकर युवती धीरे से निकल गई। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि शुक्रवार को मरीजों की छुट्टी की जा रही थी। इसी में महिला भी शामिल थी। महिला की रिपोर्ट नहीं आने के कारण उसे दूसरे अस्पताल में भर्ती किया जा रहा था, लेकिन उसके पहले ही महिला गायब हो गई। महिला ने अपना पता जूना रिसाला बताया है और नंबर भी गलत है। युवती को ढूंढ़ने में असफल पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। अधिकारियों ने अधीनस्थ अधिकारियों को युवती को ढूंढ़ निकालने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं, वहीं प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही पर भी सवाल खड़े किए हैं।
परिजन को भी नहीं ढूंढ़ पा रहे
कोरोना पॉजिटिव युवती का पता और मोबाइल नंबर गलत होने के कारण उसके परिजन को भी ढूंढ़ना मुश्किल है। यह बात जरूर सामने आई थी कि उसे भगाने में किसी व्यक्ति का हाथ है। अस्पताल से निकलने के बाद किसी ने उसे लिफ्ट दी, इसके बाद वह कहां गई... कोई नहीं जानता। अस्पताल के एक डॉक्टर ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि दो दिन पहले 13 लोग कोरोना निगेटिव आए थे, वहीं भागी हुई युवती की रिपोर्ट शाम को पॉजिटिव आई।
रिपोर्ट को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं
एमजीएम मेडिकल कॉलेज शहर में कोरोना पॉजिटिव मरीज की संख्या 121 बता रहा है, जबकि एम्स भोपाल ने जो रिपोर्ट जारी की है, उसमें इंदौर में पॉजिटिव मरीजों की संख्या 128 है। सात रिपोर्ट को लेकर अभी भी स्थिति साफ नहीं हो पाई है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के अनुसार मरने वालों की संख्या दस है। सोलह ऐसे मरीज थे, जो टीबी चेस्ट सेंटर में लाए गए थे। उनकी अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं आई है और उनकी मौत हो चुकी है। इस तरह इंदौर में मरने वालों की संख्या अनधिकृत रूप से छब्बीस हो चुकी है। एम्स और एमजीएम मेडिकल कॉलेज में तीन सौ सेंपल भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट आना बाकी है और शक है कि इंदौर में कोरोना पॉजिटिव मरीज का आंकड़ा दो सौ पार कर सकता है।