पिता ने मेरे अमेरिका जाने के लिए 1 साल का वेतन खर्चा था

पिता ने मेरे अमेरिका जाने के लिए 1 साल का वेतन खर्चा था

वाशिंगटन । गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने यूट्यूब के जरिए 2020 बैच के ग्रैजुएशन सेरेमनी का शुरुआती भाषण दिया जिसमें उन्होंने कहा, मेरे पिता ने मेरे अमेरिका के टिकट के लिए एक साल का वेतन खर्च कर दिया था, ताकि मैं स्टैनफोर्ड में पढ़ सकूं। उन्होंने कहा कि 21 साल की उम्र में वे अमेरिका आए थे। स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए उन्होंने भारत छोड़ा था। उस समय मैं पहली बार प्लेन में बैठा था। उन्होंने अमेरिका में रहने के शुरुआती दिनों के बारे में भी बताते हुए कहा कि अमेरिका में रहना महंगा था। घर पर फोन करने पर एक मिनट के दो डॉलर लगते थे। यानी आज के हिसाब से 150 रुपए। एक बैकपैक की कीमत उनके पिता की महीनेभर की सैलरी के बराबर थी। इसके अलावा परिवार, दोस्त और गर्लफ्रेंड जो अब पत्नी हैं, याद आते थे। ऐसे समय में केवल कंप्यूटर ही ऐसी चीज थी, जिसने सहारा दिया।

 सुंदर पिचाई बोले- छात्र बेसब्री को न खोए

पचाई ने कहा कि किस्मत, तकनीक को लेकर जूनून और खुले दिमाग की वजह से ही वे आज यहां है। उन्होंने कहा, टेक्नोलॉजी कभी-कभी आपको उकता सकती है। बेसब्र कर सकती है, लेकिन इस बेसब्री को मत खोना। इसके जरिए नई तकनीकी क्रांति होगी। इसके जरिए आप वह कर पाएंगे, जो मेरी जनरेशन सोच भी नहीं पाएगी। इससे दुनिया को वह तरक्की मिलेगी, जिसकी उसे जरूरत है।

आईआईटी खड़गपुर से की थी इंजीनियरिंग

सुंदर पिचाई ने आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद अमेरिका गए। वहां स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री ली। बाद में उन्होंने व्हार्टन स्कूल से एमबीए भी किया। 2004 में वे गूगल से जुड़े थे।

 कोरोना से जीतेंगे हम

पिचाई ने कहा कि कोरोना हम जीतेंगे। मैं यह इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि आपसे पहले भी कई लोग ऐसा कर चुके हैं। 100 साल पहले 1920 की कक्षा के छात्र भी महामारी के बीच ग्रेजुएट हुए थे। 50 साल पहले 1970 की कक्षा के छात्र वियतनाम युद्ध के बीच ग्रेजुएट हुए थे और 20 साल पहले 2001 की कक्षा के छात्र 9/11 हमले से ठीक पहले ग्रेजुएट हुए थे। इस तरह के कई उल्लेखनीय उदाहरण हैं। इतिहास की लंबी कहानी हमें बताती है कि उम्मीद रखने के बहुत से कारण हमारे पास हैं।