बीहड़ों में चंबल नदी के किनारे मादा घड़ियालों ने बनाए सैकड़ों ठिकाने

 28 Jun 2020 11:09 PM  1

ग्वालियर। माना जाता है कि दुनिया में सबसे ज्यादा घड़ियाल कहीं हैं तो वह चंबल है। कटाव भरे रास्तों से होकर यह चंबल पाली (राजस्थान) से पचनदा (इटावा) तक प्रवाहित हो रही इस नदी के आसपास इंसान से इतर दूसरे वन्य प्राणियों की कॉलोनियां हैं। चंबल के बीहड़ सुरक्षित ठिकाना होने के कारण सबसे ज्यादा 1859 घड़ियाल इस चंबल सेंचुरी में रहते हैं। यह समय अंडों से बाहर आ चुके नवजात घड़ियालों के लिए दुनिया देखने का है। सेंचुरी में मादा घड़ियालों ने एक दो नहीं बल्कि राजस्थान से इटावा तक सैकड़ों घोंसले (ठिकाने ) हैं। खास बात है कि लॉक डाउन होने से सैलानियों की संख्या जीरो हो गई तो वाहनों की तेज आवाज और लोगों की चहल कदमी से सेंचुरी में शोर सुनाई ही नहीं दे रहा। इसका लाभ इस शांतप्रिय और शर्मीले स्वभाव के घड़ियालों को हो रहा है।

टीलों में अंदर रखती हैं अंडे
मादा घड़ियालों ने अपने बच्चे कहीं चंबल में बने आईलेंड पर दिए हैं तो नदी किनारे रेत के टीलों में एक मीटर तक अंदर रखता है और वह दूर बैठकर नवजात बच्चों पर नजर भी रखती है। बच्चों का विकास होते ही मादा  घड़ियाल उन्हें नदी किनारे पानी में चलना और धूप से बचना सिखाती है।  इन दिनों वह कुछ ऐसा ही कर रहीं है।  वन्य प्राणी विशेषज्ञ  डा.मनोज जैन कहते हैं कि कि अंडों से बच्चों के बाहर आने के बाद उन्हें नदी से परिचय  मादा घड़ियाल ही कराती है।

बच्चों के लिए प्राणघातक है बारिश  
जंगल में वन्य प्राणियों के बीच रहने वाले विमल शर्मा कहते हैं कि मानसूनी सीजन में जब नदी में पानी ज्यादा आ जाता है तो वह न सिर्फ रेत बल्कि नवजात घड़ियालों को भी बहा ले जाता है। इसीलिए इनकी मृत्युदर भी बहुत ज्यादा है। औसतन एक मादा  घड़ियाल अगर 70 से  90 बच्चे देती है तो बमुश्किल तीन-चार बच्चे जिंदा बचते हैं।