स्वास्थ्य विशेषज्ञ बोले- भारत में खतरा बढ़ा, कोरोना का हो चुका है कम्युनिटी ट्रांसमिशन

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बोले- भारत में खतरा बढ़ा, कोरोना का हो चुका है कम्युनिटी ट्रांसमिशन

नई दिल्ली। एम्स के डॉक्टरों और आईसीएमआर शोध समूह के दो सदस्यों सहित स्वास्थ्य विशेषज्ञों के एक समूह का कहना है कि देश की घनी और मध्यम आबादी वाले क्षेत्रों में कोरोना के सामुदायिक प्रसार यानी कम्युनिटी ट्रांसमिशन की पुष्टि हो चुकी है। इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन (आईपीएचए), इंडियन एसो. आफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन (आईएपीएसएम) तथा इंडियन एसो. आफ एपिडेमियोलॉजिस्ट के विशेषज्ञों द्वारा तैयार रिपोर्ट पीएम मोदी को सौंपी गई है। रिपोर्ट के अनुसार कम्युनिटी ट्रांसमिशन से कोरोना को खत्म करना अवास्तविक जान पड़ता है। चौथे चरण में बढ़ा संक्रमण रिपोर्ट के अनुसार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के प्रयास में चौथे लॉकडाउन में दी गई राहतों के कारण कोरोना बढ़ा है। सरकार का मानना है कि अभी भारत कोरोना के दूसरे चरण में है, जबकि कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि तीसरा चरण शुरू हो चुका है।

एपिडेमियोलॉजिस्टस से नहीं ली सलाह

कोविड कार्य बल के 16 सदस्यीय संयुक्त समूह में आईएपीएसएम के पूर्व अध्यक्ष और एम्स दिल्ली में सामुदायिक चिकित्सा केंद्र के प्रमुख डॉ. शशि कांत,आईपीएचए के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सीसीएम एम्स के प्रोफेसर डॉ संजय के राय, सामुदायिक चिकित्सा, आईएमएस, बीएचयू, वाराणसी के पूर्व प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. डीसीएस रेड्डी, डीसीएम और एसपीएच पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के पूर्व प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. राजेश कुमार शामिल हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि महामारी से निपटने के उपायों संबंधी निर्णय लेते समय एपिडेमियोलॉजिस्टस से सलाह नहीं ली गई। रिपोर्ट में कहा गया है , भारत सरकार ने एपिडेमियोलॉजिस्टस से परामर्श लिया होता,क्योंकि उन्हें अन्य की तुलना में इस बारे में बेहतर समझ होती है।

खुशखबरी! इटली के डॉक्टर्स का दावा- कमजोर होने लगा वायरस

रोम। इटली के डॉ. मैट्टेओ बासेट्टी ने दावा किया है कि कोरोना वायरस धीरे- धीरे अपनी क्षमता खो रहा है और अब उतना जानलेवा नहीं रह गया है। कोरोना अब कमजोर पड़ रहा है। वहीं लोम्बार्डी के सैन राफेल अस्पताल के प्रमुख अल्बर्टो जांग्रिलो ने बताया, वास्तव में, वायरस क्लीनिकली रूप से अब इटली में मौजूद नहीं है। पिछले 10 दिनों में लिए गए स्वैब सैंपल से पता चलता है कि एक या दो महीने पहले की तुलना में अब इनमें वायरल लोड की मात्रा बहुत कम है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अभी भी कोरोना से डरने की जरूरत है। वायरस अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है, इसलिए सोशल डिस्टेंसिंग और सावधानी बरतना आवश्यक है।