नाबालिग बच्चे ने वाहन से दुर्घटना की तो परिजन को भुगतना पड़ेगा परिणाम

नाबालिग बच्चे ने वाहन से दुर्घटना की तो परिजन को भुगतना पड़ेगा परिणाम

इंदौर। बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकने तथा सुचारु यातायात के ध्येय को लेकर सरकार सजग है। लोगों को नियमों के पालन की ताकीद दी जा रही है, इसके बावजूद कई वाहन चालक नियमों के परे जाकर यातायात का उल्लंघन कर रहे हैं। ऐसे वाहन चालकों पर लगाम कसने के लिए सरकार ने मोटर व्हीकल एक्ट 1988 में भारी परिवर्तन किए हैं, जो 1 सितंबर से लागू होने जा रहे हैं। इसके चलते अब नाबालिग बच्चों ने वाहन चलाकर दुर्घटना की तो माता पता, अभिभावक या गाड़ी मालिक को तीन साल की सजा होगी। नया एक्ट लागू होने के पूर्व पुलिस ने शहर में बढ़ती स्कूली वाहन दुर्घटनाओं को देखते एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र के निर्देशन व एसपी मुख्यालय ओपी त्रिपाठी के मार्गदर्शन में कंट्रोल रूम में स्कूल/कॉलेज के परिवहन अधिकारियों की बैठक आयोजित की। इसमें स्कूल/कॉलेज बसों में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए गए। विभिन्न स्थानों पर स्कूल-कॉलेज बसों का चेकिंग अभियान चलाया गया। यहां चली मुहिम डीएसपी संतोष उपाध्याय, बसंत कौल एवं पश्चिम क्षेत्र में एचके कन्हौआ व एचएस रघुवंशी के नेतृत्व में स्कूल-कॉलेज बसों का चेकिंग अभियान चलाया गया। ट्रैफिक पुलिस की 6 टीमों ने विजयनगर, सत्संग चौराहा, व्हाइट चर्च चौराहा, वर्ल्डकप चौराहा, गंगवाल बस स्टैंड, 60 फीट रोड, आईटी पार्क चौराहा, रामचंद्र नगर चौराहे पर चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान 900 वाहनों में सुरक्षा बिंदु, स्पीड गवर्नर, कैमरे, जीपीएस का उपयोग, फायर उपकरण, फर्स्ट एड बॉक्स, इमरजेंसी गेट आदि चेक किए गए।

खामियां दूर करने की हिदायत

इन बसों में छोटी-छोटी कमियां पाई गर्इं, जिन्हें सुधारने के लिए ड्राइवर और स्कूल संचालकों को हिदायत दी गई। अधिकारियों ने बच्चों की सुरक्षा को गंभीरता से लेते हुए स्कूल संचालकों, पालकों एवं आम जनता से अपील की है कि किसी भी स्कूल-कॉलेज बसों में अनियमितता दिखने पर तत्काल ट्रैफिक पुलिस को सूचित करें।