लॉकडाउन में आधी रात को भी ब्लड की जरूरत पड़ी तो सामने आए   ब्लडडोनर्स

लॉकडाउन में आधी रात को भी ब्लड की जरूरत पड़ी तो सामने आए   ब्लडडोनर्स

जिंदगी बचाने के लिए किसी दवा या वैक्सीन की ही जरूरत नहीं होती, बल्कि ब्लड डोनेट कर भी किसी की जिंदगी बचाई जा सकती है। दुनिया में किसी की भी रक्त यानी ब्लड की कमी से मौत न हो इसलिए ब्लड डोनेशन को बढ़ावा दिया जाता है और हर साल 14 जून को वर्ल्ड ब्लड डोनर डे मनाया जाता है। वर्ल्ड ब्लड डोनेशन डे का उद्देश्य लोगों में जागरूकता फैलना है, जिससे लोग आगे आकर ब्लड डोनेट करें। वर्ल्ड ब्लड डोनर डे के दिन लोग ब्लड डोनेट करते हैं, ताकि दुर्घटना पीड़ितों या जिन्हें सर्जरी के लिए ब्लड ट्रांसयूजन की जरूरत हो उनकी जान बचाई जा सके। लॉकडाउन के दौरान कईं बार ऐसी स्थिति बनी जब ब्लड की जरूरत पड़ने पर सिटी के लोग मदद के लिए आगे आए। अधिकतर डोनर लॉकडाउन के चलते अपने घर में ही थे और बाहर नहीं निकलना चाह रहे थे। लोगों के अंदर एक मिथ बन गया था कि वह बाहर निकलेंगे तो कहीं वह कोरोना की चपेट में ना आ जाएं। इस मिथ को तोड़ा लोगों ने ब्लड डोनेट किया। कुछ लोग ऐसे भी निकले जिन्होंने ना रात देखी ना दिन वे ब्लड देने के लिए आए और जिनके इस हिम्मती कदम से लोगों की जान बच सकी।डोनर्स

थैलेसीमिया पेशेंट को पवन और अंकिता ने दिया ब्लड

9 मई को रायसेन रोड पर रहने वाली महिला राजबाई धनक सुबह 8 बजे 16 वर्षीय पुत्र मनोहर को लेकर भोपाल पहुंची, जिसे थैलेसीमिया है। राजबाई ने बताया कि जब कुछ भी रास्ता नहीं बचा तो वह पैदल चलने पर मजबूर हो गई। यहां आने के बाद एक डोनर ही नहीं बल्कि कई लोगों की मदद से वह अस्पताल तक पहुंचीं। लड़के की हालत के बारे में सोशल मीडिया पर मैसेज भेजा गया। मदद की अपील की। मैसेज मिलने पर पवन और अंकिता बारचे ने ब्लड डोनेट के लिए अस्पताल पहुंचकर मदद की।

ब्लड बैंक में स्टॉक खत्म हुआ तो सलाह ने की मदद

यूथ ब्रिगेड की असमा खान ने बताया कि अप्रैल के पहले सप्ताह की बात है । इटारसी के रहने वाले एक युवक का एक्सीडेंट विदिशा रोड पर हुआ। वहां से उसे हमीदिया अस्पताल पहुंचाया गया। लॉकडाउन की वजह से ब्लड बैंक में स्टॉक खत्म हो चुका था। डॉक्टर ने15 मिनट में ब्लड की डिमांड की। उन्होंने कई लोगों से बात की तो लोग आने को तैयार ही नहीं थे। बाद में सलाह उद्दीन से बात हुई तो वे अस्पताल पहुंचे और ब्लड दिया। लोगों में एक भ्रान्ति थी डोनर्स में कोरोना में ब्लड डोनेशन नहीं कर सकेंगे। उसके लिए हमने सोशल मीडिया के जरिए लोगों को अवेयर किया। उनके लिए प्रॉपर प्रिकॉशन के साथ ब्लड डोनेट करवाया गया।

रमजान के पहले ही दिन चार दिन की बच्ची को डोनेट किया ब्लड

24 अप्रैल की रात जावेद ने पहला रोजा रखने के लिए घर में रात तीन बजे सेहरी बना रहे थे। अचानक फोन आया और पता चला कि चार दिन की बच्ची को निगेटिव ब्लड की अर्जेंट जरुरत है। बच्ची का ब्लड ट्रांसयूजन होना है। अशोका गार्डन के रहने वाले जावेद तुरंत अस्पताल पहुंचे और बच्ची को ब्लड दिया। जावेद ने कहा जब मुझे पता चला कि बच्ची सिर्फ चार दिन की है तो मैंने सोचा रमजान की शुरुआत इससे बेहतर हो ही नहीं सकती है। मेरे लिए इंसानियत मायने रखती है और जब भी मदद करने का मौका मिले तब कभी भी पीछे नहीं हटना चाहिए और मैंने भी वही किया।