इजराइल ने 200 साल पहले खत्म हो चुकी भाषा को अपनी राजभाषा बनाया: राहुल

 17 Jun 2020 12:23 AM  2

वैश्विक हिन्दी परिवार, हिन्दी प्रेमी एवं भाषा-विमर्श वाट्सएप ग्रुप द्वारा वातायन (यूके), हिन्दी राइटर्स गिल्ड (कनाडा) और झिलमिल (अमेरिका) द्वारा देश के वरिष्ठ पत्रकार और भाषाविद राहुल देव का ‘भारतीय भाषाओं का आसन्न संकट’ विषय पर आॅनलाइन व्याख्यान आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का संयोजन हिन्दी भवन के निदेशक डॉ. जवाहर कर्नावट ने किया और संचालन अक्षरम के अध्यक्ष और वैश्विक हिंदी परिवार के प्रभारी अनिल जोशी द्वारा किया गया। इस अवसर पर राहुल देव ने यह चिंता व्यक्त की कि शिक्षित और मध्यमवर्गीय परिवारों के बीच देखा जाए तो उनके बच्चों और बच्चों के बच्चों के व्यक्तिगत, सामाजिक और राजनीतिक जीवन में उनकी अपनी भाषा की स्थिति बहुत दयनीय होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मैं केवल हिंदी के भविष्य को लेकर चिंतित नहीं हूं, बल्कि अन्य भारतीय भाषाओं को लेकर भी उतना ही चिंतित हूं।

भारत में इजराइल जैसा दृढ़ निश्चय नहीं है

इजराइल का उदाहरण देते हुए राहुल देव ने इस बात को स्वीाकार किया कि भारत में इजराइल जैसा दृढ़ निश्चय नहीं है। इजराइल ने लगभग 200 साल पहले लगभग मृतप्राय हो चुकी भाषा को अपनी राजभाषा बनाया और आज सभी शोधकार्य तक उसी भाषा में हो रहे हैं। समाधानों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस दिशा में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, न्यायपालिका, विधायिका और शिक्षा जगत की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होगी, लेकिन इन पर दबाव बनाने के लिए जन आंदोलन का होना जरूरी है।