7 साल 3 महीने 3 दिन बाद निर्भया को न्याय

7 साल 3 महीने 3 दिन बाद निर्भया को न्याय

नई दिल्ली। आखिरकार निर्भया के चारों दोषियों को शुक्रवार को सुबह 5.30 बजे फांसी दे दी गई। 16 दिसंबर, 2012 को हुई इस घटना के बाद 7 साल 3 महीने और 3 दिन बीतने के बाद निर्भया को इंसाफ मिल गया। इससे पहले गुरुवार को चारों दोषियों ने दिनभर में 6 से ज्यादा याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में लगाई थीं, लेकिन दरिंदों को किसी भी कोर्ट ने राहत नहीं दी। वहीं देर रात भी चार में से 3 दोषी दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे थे। यहां से याचिका खारिज होने के बाद रात में ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। इससे पहले, पटियाला हाउस कोर्ट ने 5 मार्च को चारों दोषियों- मुकेश, अक्षय, पवन और विनय के खिलाफ डेथ वॉरंट जारी करते हुए फांसी के लिए 20 मार्च को सुबह साढ़े 5 बजे का वक्त तय कर दिया था।

‘भगवान से मिलने वाला है आपका क्लाइंट, जल्दी कीजिए’

गुरुवार देर रात दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे दोषियों के वकील एपी सिंह से कोर्ट ने कहा था कि हम उस समय के करीब हैं, जब आपका क्लाइंट भगवान से मिलने वाला है। टाइम मत बर्बाद कीजिए। हम आखिरी वक्त में आपकी मदद नहीं कर पाएंगे अगर आप कोई महत्वपूर्ण पॉइंट नहीं उठा सकते। अगर आपका कोई पॉइंट है तो बताइए। जस्टिस मनमोहन ने वकील से कहा था, आपको हमारे साथ फेयर होना पड़ेगा। आप इस वक्त आते हैं, जब फांसी होने में 5-6 घंटे होते हैं और अपना पॉइंट्स भी नहीं समझा पा रहे हैं। दुर्भाग्य से आपकी याचिका का कोई कानूनी आधार नहीं है। 

रात में हाईकोर्ट फिर सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज

मां ने कहा- आज का सूरज देश की बच्चियों के नाम- मैं सबको धन्यवाद देती हूं। देश की बच्चियों की लड़ाई अंजाम तक पहुंची है। अदालतों में देर करने की टैक्टिक्स अपनाई गई । मैं महामहिम राष्ट्रपति का भी शुक्रिया करती हूं। वो मेरी बेटी नहीं थी, बल्कि पूरे देश की बेटी थी। आज का सूरज देश की बच्चियों के नाम। - आशा देव 

पिता बोले- फांसी कोई रास्ता नहीं, कहने वाले देशद्रोही-इस घटना के बाद भी समाज और सिस्टम ने कोई सबक नहीं लिया। जो लोग कहते हैं कि फांसी कोई रास्ता नहीं है, इस तरह की मानसिकता रखने वाले लोग देशद्रोही हैं। ऐसे लोग देश का खाते हैं, लेकिन उनके शरीर के अंदर देश का खून नहीं है। अफजल - बद्रीनाथ सिंह 

17 दिसंबर, 2012: पुलिस ने आरोपियों की पहचान बस ड्राइवर राम सिंह, उसके भाई मुकेश, विनय शर्मा और पवन गुप्ता के रूप में की।

18 दिसंबर, 2012:चार आरोपी गिरμतार हुए।

21 दिसंबर, 2012: पांचवां नाबालिग आरोपी आनंद विहार बस टर्मिनल से पकड़ा गया।

21-22 दिसंबर, 2012:अक्षय को बिहार के औरंगाबाद से पकड़कर दिल्ली लाया गया।

29 दिसंबर, 2012: मौत से 13 दिनों तक जंग लड़ने के बाद पीड़िता ने सिंगापुर के अस्पताल में दम तोड़ा था।

  ऐसे दरिंदों को तुरंत हो फांसी

  ऐसे  केसों में अपराधियों को जल्द सजा होनी चाहिए। निर्भया के दोषियों को सजा मिलने में काफी देर
  हुई जिसका दु:ख सारे देश को है।-अस्मा खान, सामाजिक कार्यकर्ता

  निर्णय होने के बाद फांसी देने में देरी होना सही नहीं है। इस केस में देरी से कुछ कमियां आई हैं। ये ठीक हो जाएं
  तो फैसले का महत्व बढ़ेगा।-साक्षी मिश्रा, स्टूडेंट

 ये समाज के हर एक व्यक्ति के लिए एक अच्छी खबर है। ऐसे अपराध के दोषियों को बक्शा नहीं जा सकता। ये हर लड़की के लिए  राहत की बात है।- मुस्कान पाठक, स्टूडेंट

 यह फांसी की सजा दोषियों को आज नहीं उसी समय दे देनी चाहिए थी जब उन्होंने घिनौना काम किया था, ऐसे लोगों के लिए  फांसी की सजा भी कम है।
 - वर्षा श्रीवास्तव, एंकर

 निर्भया केस में 7 साल बाद दोषियों को फांसी हुई। अब लड़कियां थोड़ा बहुत खुद को सुरक्षित महसूस करेंगी। गलत
 करने वालों के मन में डर भी होगा।-आशी चौहान,सामाजिक कार्यकता