MIC मिनट्स तैयार होते ही 10-12 दिन में हटा दी जाएगी एस्सेल कंपनी

MIC मिनट्स तैयार होते ही 10-12 दिन में हटा दी जाएगी एस्सेल कंपनी

जबलपुर । कचरे से बिजली बनाने वाले प्लांट सहित शहर की डोर टू डोर कचरा कलेक्शन की व्यवस्था के लिए 4 साल से काम कर रही एस्सेल कंपनी अब शहर में 10-12 दिन की मेहमान है। नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग को विगत दिनों हुई एमआईसी बैठक के मिनट्स का इंतजार है,जिसके बाद कंपनी की विदाई सुनिश्चित कर दी जाएगी। विगत दिनों हुई एमआईसी बैठक में काम में लापरवाही के चलते एस्सेल कंपनी से काम वापस लिए जाने का निर्णय हो चुका है। इस निर्णय को अमल में लाया जाएगा। कई दिनों से एस्सेल कंपनी अपना स्वामित्व बेचने के चक्कर में भी है। बताया जा रहा है कि ब्रिटिश मूल की दुबई बेस्ड एर्बाडा कंपनी ने एस्सेल से शेयर खरीद लिए हैं। यही कंपनी आगे काम करेगी।

नहीं किया निविदा शर्तों के मुताबिक काम

4 साल के कार्यकाल में कंपनी ने निविदा की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन किया। न तो निर्धारित मात्रा में कचरा वाहन लगाए गए और न ही वाहनों को ढंककर रखा गया। टिपर वाहनों की सप्ताह में 2 बार धुलाई भी नहीं करवाई गई जिसके कारण ये टिपर शहर में गंदगी और बीमारी बांटते रहे। कचरा न उठने से और नियमित रूप से शहर के सभी घरों से कचरा कलेक्शन न होने पर नगर निगम की शहर में भारी लानत- मलानत हुई।

ऊंची पहुंच का फायदा

एस्सेल कंपनी का स्वामित्व राज्य सभा सदस्य और भाजपा के बड़े नेता व उद्योगपति के पास होने से उनका प्रभामंडल इस कंपनी के लिए कवच रहा। कभी भी कं पनी द्वारा बरती जाने वाली अनियमितताओं पर कड़ाई नहीं बरती गई। दिखावे के लिए इक्का-दुक्का बार भुगतान रोका गया जो कि कुछ दिनों बाद जारी करवा दिया गया।

ननि को नहीं मिला 21 रुपए टन कचरे का रिटर्न

निविदा शर्तो  में शामिल था कि प्रति टन 21 रुपए का भुगतान कंपनी नगर निगम को करेगी। यह राशि भी अच्छी खासी हो गई मगर इसका भुगतान भी कंपनी ने नगर निगम को नहीं किया।

शेयर का खेल

बताया जा रहा है कि कंपनी के ज्यादातर शेयर एस्सेल कंपनी के पास हैं जो कि ब्रिटिश मूल की कंपनी अबार्डा को ट्रांसफर होने की प्रक्रिया हो गई है। अब इस नई कंपनी को नगर निगम आजमाएगा। कंपनी की कार्यप्रणाली सामने आकर बताएगी कि आगे काम कैसे चलेगा।

फैक्ट फाइल

178 करोड़ से लगा था कचरे से बिजली बनाने का प्लांट

2016 सितंबर में हुआ था शुरू

650 टन कचरे की रोजाना जरूरत

11.5 मेगावाट बिजली प्रतिदिन बनाने कीक्षमता

450 टन कचरा प्रतिदिन शहर से जाता था कठौंदा

1425 रुपए प्रति टन ननि करता है भुगतान