सूखे कचरे के निपटान के लिए लगाया नया प्रोसेसिंग प्लांट

सूखे कचरे के निपटान के लिए लगाया नया प्रोसेसिंग प्लांट

इंदौर। सरकार के स्वच्छता सर्वेक्षण में देश के चार हजार से ज्यादा शहरों को पीछे छोड़कर तीन बार सफाई का खिताब जीतने के बाद चौथी बार अपनी बादशाहत को बरकरार रखने के लिए इंदौर ने प्रयास तेज कर दिए हैं। शहर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पॉलिसी के तहत निगम ने सफाई के क्षेत्र में ट्रेंचिंग ग्राउंड पर एक बड़ा प्लांट स्थापित किया है। इस प्लांट के जरिए शहर से निकलने वाले सूखे कचरे का निपटान किया जाएगा। 30 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित इस प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 300 टन कचरे की रिसाइकलिंग करने की है।

पीपीपी मोड पर होगा संचालन- अपर आयुक्त रजनीश कसेरा ने बताया कि यह प्लांट पीपीपी मोड पर संचालित होगा। गुजरात की नेप्रा कंपनी को यह काम दिया गया है। प्लांट का लोकार्पण 13 नवंबर को नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धनसिंह करेंगे। इस प्लांट से प्रतिदिन 300 टन कचरे का निपटान होगा। मप्र का यह पहला प्लांट होगा, जो रोज इतनी बड़ी मात्रा में कचरे का निपटान करेगा। उन्होंने बताया कि यहां डंप कचरे से पॉलिथीन व प्लास्टिक जैसे रिसाइकलिंग योग्य कचरे को अलग किया जाएगा। बिक्री योग्य सूखे कचरे को तीन बार पानी से साफ करने के बाद बिक्री की जाएगी। जीरो वेस्ट सेंटर में सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग करने की व्यवस्था की गई है। सेंटरों में पॉलिथीन, प्लास्टिक, कागज, पुस्ठा व अन्य सूखा कचरा अलग करने के बाद बेचा जा रहा है।

8 तरह का कचरा हो रहा अलग

नगर निगम ने डेढ़ साल के प्रयास से देश का पहला व्यवस्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड तैयार किया। अन्य शहरों के ट्रेंचिंग ग्राउंड में जहां सर्वे टीम को कचरे के पहाड़ दिखे, वहीं इंदौर में कवर्ड शेड, बगीचे और उनमें लगे खूबसूरत फूलों के पौधे दिखाई दिए। यहां आठ तरह का कचरा अलग- अलग किया जा रहा है। ट्रेंचिंग ग्राउंड में पुराने कचरे का निपटान करके उसके ऊपर बगीचे बनाए जा रहे हैं। देश में पहली बार किसी शहर के ट्रेंचिंग ग्राउंड को आईएसओ के तीन पत्र मिले हैं। अब यहीं पर एक और प्लांट स्थापित किया जा रहा है।

...इसलिए अलग-अलग करते हैं सूखे और गीले कचरे को

कसेरा ने बताया कि सिर्फ गीले कचरे से (जैसे हरी सब्जियों के छिलके, बचे हुए भोजन, दाल, रोटी) कम्पोस्ट खाद बनाकर इसका निपटान किया जाता है। सूखे कचरे जैसे प्लास्टिक, लकड़ी, धातु, रसायनों से निर्मित पैकिंग सामग्री थर्माकोल आदि के कचरे का निपटान करने का अलग तरीका होता है। सूखे और गीले कचरे को मिक्स करने पर इनको बाद में अलग- अलग करना असंभव हो जाता है। इस कारण सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग कूड़ेदान में रखने को कहा जाता है और घरों से दोनों तरह के कचरे को अलग-अलग ले जाया जाता है।