जनभागीदारी के करोड़ों रुपए अफसरों ने निजी और करीबियों के खातों में जमा कराए

जनभागीदारी के करोड़ों रुपए अफसरों ने निजी और करीबियों के खातों में जमा कराए

भोपाल । यह हकीकत है जनधन को हड़पने की सुनियोजित चाल का, जिसका खुलासा होने के बाद भी कार्रवाई के बजाय जांच के नाम पर लीपा-पोती जारी है। जिलों में विभिन्न विकास कार्यों को पूरा करवाने के लिए जनता की सहभागिता करवाई जाती है, जिसके लिए विकास कार्य की लागत राशि का आधा या चौथाई हिस्सा जनभागीदारी से जुटाया जाता है। विभिन्न विभागों के कामोें के लिए इकट्ठा होने वाली यह राशि छोटे से छोटे जिले में भी दस से बारह करोड़ रुपए होती ही है। इसी राशि को जिला अधिकारियों ने अपने निजी खातों के साथ ही अपने रिश्तेदारों और करीबियों के बैंक खातों में शिफ्ट किया गया है।

आर्थिक अपराध के साथ ही ब्याज हानि भी

सूत्रों की माने तो करोड़ों रुपए निजी खातों में जमा करवाने के नतीजे में सरकार को इस राशि पर मिलने वाले ब्याज की सीधेसी धे हानि हुई है। यह ब्याज अफसरों ने हड़पा है। साथ ही सरकारी राशि को निजी खातों में जमा करवाना आर्थिक अपराध है, लेकिन खुलासों के बाद भी संबंधित अधिकारियों से मूल राशि के साथ ही ब्याज वसूलने और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने के बजाय जांच की आड़ ली जा रही है।

अन्य जिलों की गुपचुप छानबीन

दो जिलों में सरकारी राशि को निजी बैंक खातों में जमा करवाकर हड़पने की चाल का खुलासा होने के बाद हड़कंप मच गया है। विभागीय सूत्रों का दावा है कि इसके बाद से ही प्रदेश के बाकी जिलों से भी इस बारे में पूछताछ शुरु हो गई है कि जनभागीदारी की राशि कितनी है और क्या सरकारी खाते में ही जमा है या निजी खातों में जमा करवाई गई है। साथ ही जिलों को चेताया जा रहा है कि तत्काल सरकारी राशि को निर्धारित सरकारी खाते में ही जमा करवाना सुनिश्चित करें।

पहला मामला

रायसेन जिला। जनभागीदारी के करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपए जिला अधिकारियों और उनके करीबियों के निजी खातों में जमा करवा दिए गए। करीब दो साल बाद सुगबुगाहट होने पर टुकड़ों-टुकड़ों में करीब 96 लाख रुपए जमा करवाए गए। बाकी राशि जमा नहीं करवाने के बाद भी कार्रवाई की फाइल दबी पड़ी है।

दूसरा मामला

राजगढ़ जिला। जनभागीदारी के साढे सात से आठ करोड़ रुपए जिला अधिकारियों ने गुपचुप अपने और रिश्तेदारों के खातों में किश्तों में ट्रांसफर कर दिए। इसका पता चलने के बाद भी मुख्यालय स्तर का लचर रवैया रहा, जिससे राशि वापस सरकारी खाते में नहीं आ सकी है। हालांकि शोकॉज नोटिस जारी किए गए है।