ऑपरेशन हो या इमरजेंसी महज 25 फीसदी मरीज ही पहुंचे हमीदिया

ऑपरेशन हो या इमरजेंसी महज 25 फीसदी मरीज ही पहुंचे हमीदिया

भोपाल । शहर के हर वर्ग के लिए मुसीबत के समय सहारा बनने वाले हमीदिया अस्पताल में कभी पैर रखने के लिए भी जगह नहीं होती थी, लेकिन अब यहां सन्नाटा पसरा हुआ है। लॉकडाउन में आम दिनों के मुकाबले यहां महज 25 फीसदी मरीजों का ही इलाज हुआ है, वो भी तब जब कोई इमरजेंसी हुई। हमीदिया अस्पताल में कई ऐसे भी मरीज थे, जिन्हें ट्रीटमेंट न मिलने की वजह से मायूस ही लौटना पड़ा, लेकिन कुछ गंभीर मरीजों के परिजनों द्वारा मिन्नत करने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की इजाजत मिल सकी। हालांकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जैसे लॉकडाउन में रियायत मिल रही है, वैसे मरीजों के आने का सिलसिला भी सामान्य होता जा रहा है और आने वाले समय में सब कुछ सामान्य होगा।

नहीं मिला इलाज

दस दिन पहले मेरे भांजे की तबीयत रात करीब एक बजे अचानक खराब हो गई। उसकी उम्र तीन साल है। उसके पेट में दर्द था और उल्टियां हो रही थीं। हम उसे अस्पताल ले गए, जहां ट्रीटमेंट नहीं मिला।इसके बाद हम बैरसिया रोड स्थित एक प्राइवेट अस्पताल पहुंचे जहां भी डॉक्टर ने सिर्फ पर्चे में दवा लिखकर दे दी।

लॉकडाउन ने बिगाड़ दिए हालात

मेरी पत्नी सुगन बाई को पैरालाइसिस हो गया था। कोरोना और लॉकडाउन जैसे हालातों में उनकी तकलीफ बढ़ती जा रही थी, लेकिन हमीदिया अस्पताल में उनकी सुनवाई नहीं हुई। जब उनकी पत्नी की हालत गंभीर हुई तब काफी मशक्कत के बाद उनको भर्ती किया गया।