बालश्रम के दलदल से बाहर निकाल कर बच्चों को जोड़ रहे स्कूल स

बालश्रम के दलदल से बाहर निकाल कर बच्चों को जोड़ रहे स्कूल स

भोपाल । मप्र में बालश्रम बड़ी चुनौती है। सरकार व बच्चों से जुड़ी संस्थाएं इससे लड़ने में जुटी हैं। राजधानी में ही बच्चों की बिग्रेड आसपास के बच्चों को बालश्रम से निकालकर शिक्षा से जोड़ रही है। एंटी चाइल्ड लेबर डे पर हम इस बाल पंचायत से रूबरू कराते हैं, जिसने नुक्कड़ नाटक के जरिए जागरूक कर पुलिस व प्रशासन की मदद से बालश्रम से मुक्त कराकर स्कूल तक भेजा।

कजिन सहित पांच बच्चों को बचाया 

ईश्वर नगर बस्ती के बाल समूह की राजकुमारी मोहेले ने एक साल पहले चाइल्ड लाइन को अपनी बस्ती में बालश्रम में धकेले जा रहे बच्चों की जानकारी दी थी। राजकुमारी बताती हैं कि उसका कजिन भाई और अन्य दोस्त सुबह-सुबह बालश्रम के लिए जाते थे। एक भैय्या मोटर साइकिल पर आकर इन सभी बच्चों को रोज अपने साथ में ले जाते थे। राजकुमारी कहती हैं कि उनका भाई स्कूल तो जाता था, लेकिन उसे इस काम का चस्का लग गया था और वह बचे हुए पैसे से नशा करने लगा था। राजकुमारी ने चाइल्ड लाइन सहित पुलिस को जानकारी देकर उस युवक को पकड़वाया और बच्चों को फिर से पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। अब वह पढ़ाई के साथ अपने घर के लोगों के साथ सहयोग कर रहा है। उन्होंने बताया कि वह जहां भी ऐसी जानकारी मिलती है, संबंधित की सहायता के लिए सक्रिय रहती हैं।

 गुब्बारे बेचने वाले बच्चे को स्कूल पहुंचाया

 16 वर्ष की पल्लवी मोहबे ईश्वर बाल पंचायत समूह की प्रवक्ता हैं। वह बताती हैं कि लगभग 6 माह पहले एक बच्चे का स्कूल में एडमिशन कराया है। पहले यह बच्चा गुब्बारे बेचा करता था। पल्लवी ने बात की तो बच्चे ने बताया कि वह स्कूल जाना चाहता है, लेकिन एक तो काम करना मजबूरी है और दूसरा उनके पास कोई कागज नहीं। इसलिए सरकारी स्कूल में दाखिला नहीं हो रहा। पल्लवी ने बच्चों के लिए काम करने वाली संस्थाओं की मदद से बच्चे का एडमिशन कराया। पल्लवी कहती हैं कि ईश्वर, मीरा और पीसी नगर जैसी बस्तियों और स्कूल आते-जाते कई बच्चे काम करते दिखाई देते हैं। उनको हमारे साथ स्कूल में होना था, पर वे बालश्रम में लगे हुए हैं। हम 2015 से नाटक की मदद से लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इससे हमारा आत्म विश्वास बढ़ा है और समूह से नए बच्चे जुड़ रहे हैं।