जिले में पान की खेती को फिर से विकसित किया जाए

 13 Jun 2020 11:37 PM  3

ग्वालियर कॉन्फेडरेशन आॅफ आॅल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के द्वारा नये व्यवसाय की संभावनाओं विषय पर राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. राव ने कहा कि ग्वालियर में पान की खेती को पुन: विकसित किया जाये और इसके बाय प्रॉडक्ट बनाकर हम पुन: निर्यात करने की दिशा मे बढ सकते हैं। डॉ. राव ने कहा कि राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में एग्रीकल्चर बिजनेस में 150 से भी अधिक ऐसी चीजें हैं जिन पर हम काम कर सकते हैं। उन्होंने पौष्टिक आहार एवं जैबिक खेती से लेकर मशरूम उत्पादन तक की जानकारी दी। उन्होंने ग्वालियर के व्यापारी एवं उनके शिक्षित बच्चों को भी कहा कि 75 प्रतिशत ग्रामीण भारत में व्यापार की अनेक संभावनाएं हैं। अत: वे एग्रीकल्चर प्रॉडक्ट में जुडें। डॉ. राव ने चंबल अंचल में बांस की खेती के माध्यम से अगरबत्ती की काडी एवं अगरबत्ती बनाने की बात भी कही। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को भारत के सफल उद्यमी हर्षपाल सिंह चौधरी ने भी संबोधित किया। उन्होेंने कहा कि मध्यप्रदेश मेडीसिन प्लांट का हब है। यहां की हर चीज निर्यात के लिए तैयार है। यूरोप और अमेरिका में अनार, अंगूर और टमाटर के पाउडर की बहुत बढ्ढडी मात्रा में सप्लाई होती है। उन्होेंने युवाओं को कहा कि अब चायना की क्वालिटी का पदार्फाश हो चुका है। विश्व पटल पर भारत की छवि अच्छी हो और हम हैल्थ केयर को ध्यान में रखते हुए एग्रीकल्चर प्रॉडक्ट का निर्माण करें। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के प्रारम्भ में कॉन्फेडरेशन आॅफ आॅल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) मध्यप्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र जैन ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि कॉन्फेडरेशन आॅफ आॅल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के साथ एमओयू साइन किया है और हम ग्वालियर के व्यापारियों के लिए और उनके बच्चों के लिए नये व्यापार की संभावनाएं तलाश रहे हैं। इसीलिए आज की वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित की गयी। इस अवसर पर प्रोग्राम कोर्डिनेटर सुधीर सिंह भदौरिया विशेष रूप से उपस्थित थे।