दिनों-दिन बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दाम को लेकर हर वर्ग हो रहा परेशान

 15 Jun 2020 07:37 AM  2

जबलपुर । विगत एक सप्ताह से लगाातर बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दामों से आम नागरिक कराह उठा है। उसकी यह कराह सरकार तक नहीं पहुंच रही है। लोगों का कहना है कि ऐसा लग रहा है कि कोराना संक्रमण काल का हुआ पूरा नुकसान सरकार पब्लिक से ही वसूल कर रही है। सरकार का आम जनता पर दमन चक्र इस तरह चल रहा है कि इतिहास में अब तक का सर्वाधिक टैक्स इन्हीं दो जरूरी चीजों पर लगाया गया है। गत दिवस लगातार छटवें दिन सरकार ने डीजल-पेट्रोल के रेट बढ़ाए हैं। अब पेट्रोल 4.50रुपए व डीजल 3 रुपए प्रति लीटर तक मंहगा कर दिया गया है। ताजा वृद्धि पेट्रोल पर 57 पैसे व डीजल पर 59 पैसे की है। 15 मार्च से लेकर 5 जून तक पेट्रोल-डीजल में कोई वृद्धि नहीं हुई थी मगर 12 जून तक के एक सप्ताह में पेट्रोल साढ़े 4 तो डीजल 3 रुपए मंहगा हो गया है। तेल का खेल जब कच्चा तेल 66 प्रतिशत सस्ता था तो सरकार ने 16 रुपए टैक्स बढ़ा दिया था। अभी भी क्रूड 6 माह के आधे दाम पर है फिर भी 6 दिनों में सरकार ने पेट्रोल को 3.31 और डीजल को 3.42 रुपए मंहगा कर दिया है। इस पर मप्र सरकार ने 1-1 रुपए की अतिरिक्त वृद्धि कर इसे और मंहगा कर दिया है।

ऐसे रोका आम नागरिकों का फायदा

जीएसटी लागू होने के बाद से केन्द्र सर कार पेट्रोल-डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी और रोड एंड इंफ्रॉस्ट्रक्चर सेस लगाती है। 12 मार्च तक यह दोनों मिलाकर पेट्रोल पर कुल 17 रुपए और डीजल पर 11 रुपए प्रति लीटर था। 13 मार्च को केन्द्र ने टैक्स में इजाफा किया और पेट्रोल पर कुल टैक्स 20 रुपए और डीजल पर 14 रुपए कर दिया। 5 जून को केन्द्र सरकार ने एक और बड़ी बढ़ोत्तरी की पेट्रोल पर 10 रुपए टैक्स बढ़ाकर 30 रुपए और डीजल पर 27 रुपए कर दिया। सेस मिलाकर पेट्रोल पर एक्साइज दर 32.98 रुपए,डीजल पर 31.83 रुपए हुई। इस पर भी राज्य पेट्रोल डीजल पर वैट लेते हैं। केन्द्र की ओर से टैक्स बढ़ाने से वैट की मात्रा अपने आप बढ़ जाती है। कई राज्य अलग से भी टैक्स वसूलते हैं। हैरत की बात यह है कि तेल का असल दाम 20 रुपए लीटर है और हम 70 रुपए अतिरिक्त चुका रहे हैं। यहां यह भी जान लें कि केवल पेट्रोल व डीजल ही ऐसे उत्पाद हैं जिन पर 300 प्रतिशत से ज्यादा टैक्स आम नागरिकों से वसूला जा रहा है।

कोई सुनवाई नहीं

सरकार में आम नागरिकों को होने वाली परेशानी से कोई मतलब नहीं है। आम नागरिक भी इसके लिए सड़कों पर नहीं उतरते। चुपचाप मूल्य वृद्धि को स्वीकार कर लेते हैं। यही कारण है कि चाहे केन्द्र सरकार हो या राज्य सरकार मनमाने तरीके से आम नागरिकों की जेब पर डाका डाल देते हैं।

बढ़ेगी मंहगाई

पेट्रोल-डीजल की मलयवृद्धि का सीधा असर तो जेब पर आता ही है,अप्रत्यक्ष रूप से हर नागरिक पर जो भार आता है,उसे भी समझ लें। आप जो सब्जी,अनाज,दवा या अन्य जरूरी सामान खरीदते हैं सभी का परिवहन शुल्क पेट्रोल,डीजल मंहगा होते ही बढ़ जाता है। ऐसे में आम नागरिक पर इन दोनों चीजों के मंहगे होने से चौतरफा मार पड़ती है।