100 करोड़ रुपए कमाने की उम्मीद में फिर अवैध निर्माणों को वैध करने की तैयारी

100 करोड़ रुपए कमाने की उम्मीद में फिर अवैध निर्माणों को वैध करने की तैयारी

भोपाल। राजधानी में करीब तीन साल बाद फिर नगर निगम ने कंपाउंडिंग कर अवैध निर्माणों को वैध करने की कोशिश शुरू की है। लेकिन ये कोशिश कामयाब होगी या नहीं, इसमें संदेह है। क्योंकि कंपाउंडिंग की पुरानी गणित से झोली भरने की उम्मीद लगाए है, लेकिन पुराने तजुर्बे से सीख नहीं ली है। निगम ने इससे पहले कंपाउंडिंग अभियान नवंबर-16 में चलाया था। जानकारी के अनुसार नगर निगम को अवैध निर्माण वैध करने पर 100 करोड़ रुपए कंपाउंडिंग फीस मिलने की उम्मीद थी, लेकिन गणित तब फेल हो गया जब, जोनों में लगाए कंपाउंडिंग कैंपों में महज 480 लोगों ने आवेदन फार्म लिया। जबकि शहर में संपत्तियों का आंकड़ा 4 लाख 25 हजार के करीब है। इसमें 80 फीसदी में बिल्डिंग परमिशन से ज्यादा या उसके बिना ही दुकान और मकान बने हैं।

क्यों नहीं हो पाई कंपाउंडिंग

कैपों में लोगों के न आने पर निगम ने दुकानों और मकानों की कुंडली बनाई। एक महीने चलने वाला सर्वे 12 दिनों में ही रोक दिया। क्योंकि सर्वे में 60 फीसदी ज्यादा मकानों में बिल्डिंग परमिशन से 20 से 25%ज्यादा निर्माण मिला। जबकि 20% मकानों में निर्माण बिल्डिंग परमिशन से 30 फीसदी से भी ज्यादा था। लोग निर्माण वैध कराने कंपाउंडिंग कराने को तो राजी थे, लेकिन तोड़ने के लिए नहीं। जबकि कंपाउंडिंग नियमों में परमिशन के विरुद्ध सिर्फ 10% अवैध निर्माण को ही कंपाउंडिंग कर वैध करने का प्रावधान है। इस स्थति से निपटने के लिए निगम ने नगरीय प्रशासन विभाग को कंपाउंडिंग का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा था। हालांकि, सरकार ने कंपाउंडिंग का दायरा तो नहीं बढ़ाया, बल्कि वन टाइम सेटेलमेंट प्लांट के तहत 2017-18 में कंपाउंडिंग फीस को सात गुना कम कर दिया। इससे निगम को करीब 82 करोड़ रुपए का घाटा उठाना पड़ा था।